चिड़ावा: क्षेत्र में कर्ज से परेशान होकर सूरजगढ़ तहसील के गांव रामरख की ढाणी निवासी विनोद पूनिया (50) द्वारा ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या करने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। शुक्रवार को दिनभर चले घटनाक्रम के बाद भी गतिरोध बरकरार है।

गुरुवार रात हुई इस दुखद घटना के बाद, शुक्रवार सुबह से ही गांव रामरख की ढाणी के ग्रामीणों और परिजनों में भारी आक्रोश देखा गया। परिजनों ने मृतक विनोद का पोस्टमार्टम कराने और शव लेने से स्पष्ट मना कर दिया। शव फिलहाल चिड़ावा उप जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखा हुआ है।

ग्रामीण और परिजन सुबह से ही पिलानी रोड स्थित HDFC बैंक की शाखा के बाहर धरने पर बैठ गए। विरोध प्रदर्शन के कारण देर शाम तक अधिकारियों की आवा-जाही लगी रही।
मृतक के भाई योगेंद्र ने चिड़ावा थाने में बैंक कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत दी, जिसके बाद शाम 6 बजे प्रशासन के हस्तक्षेप से एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है।

आंदोलनकारी ग्रामीण अपनी चार मुख्य मांगों पर अड़े हुए हैं जिसमें कर्ज के लिए दबाव बनाने वाले बैंक कर्मचारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई, मृतक के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, मृतक का पूरा कर्ज माफ कर परिवार को एनओसी (NOC) सौंपी जाए।

फिलहाल मृतक के भाई की शिकायत पर बैंक कर्मचारियों के खिलाफ चिड़ावा थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।
दिनभर चले इस तनावपूर्ण माहौल के बीच कई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। चिड़ावा एसडीएम डॉ. नरेश सोनी, तहसीलदार रामकुमार पूनिया, थानाधिकारी व ट्रेनी आरपीएस अंबिका चौधरी और सुलताना थाना इंचार्ज रविन्द्र कुमार ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता की।

एफआईआर दर्ज होने के बावजूद, मुआवजे और कर्ज माफी जैसी मुख्य मांगों पर अभी तक कोई सहमति नहीं बन पाई है। ग्रामीणों ने शनिवार सुबह बैंक के बाहर एक बड़ी सभा आयोजित करने का निर्णय लिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि शनिवार सुबह जयपुर से बैंक के उच्चाधिकारी वार्ता के लिए पहुंच सकते हैं। फिलहाल रात को भी धरना जारी रखने के लिए ग्रामीणों ने बैंक के बाहर टेंट लगाना प्रारंभ कर दिया है।

मृतक विनोद पूनिया ने डेयरी व्यवसाय के लिए अपने मकान को गिरवी रखकर एचडीएफसी बैंक से कर्ज लिया था। उनकी जेब से मिले सुसाइड नोट और 31,11,383 रुपये के बैंक नोटिस ने उनकी मानसिक व्यथा को उजागर किया है। उनके परिवार में पीछे एक बेटा और एक बेटी हैं, जिनके सिर से पिता का साया उठ गया है।




