Saturday, August 30, 2025
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भारत बंद के समर्थन में 25 करोड़ मजदूर और किसान, देशभर में जनजीवन प्रभावित होने की आशंका, केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में ट्रेड यूनियन और किसान संगठनों का संयुक्त प्रदर्शन, कई क्षेत्रों में सेवाएं बाधित रहने की संभावना

नई दिल्ली: केंद्र सरकार की नीतियों को मजदूर और किसान विरोधी बताते हुए देशभर में आज 9 जुलाई को भारत बंद का आह्वान किया गया है, जिसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है। यह बंद 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और विभिन्न किसान संगठनों के साझा मंच द्वारा बुलाया गया है, जिसे संयुक्त किसान मोर्चा, कृषि श्रमिक यूनियनों और क्षेत्रीय संगठनों का समर्थन भी मिला है।

इस हड़ताल में बैंकिंग, डाक, परिवहन, कोयला, निर्माण और बिजली जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लगभग 25 करोड़ से अधिक कर्मचारी और मजदूर भाग ले रहे हैं। इससे देश के कई राज्यों में सामान्य जनजीवन के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। खासकर बैंकिंग, सार्वजनिक परिवहन और डाक सेवाओं में रुकावट आ सकती है। बिजली क्षेत्र से जुड़े लगभग 27 लाख कर्मचारी भी इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन में भाग ले रहे हैं, जिससे कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

रेलवे यूनियनों ने बंद में औपचारिक भागीदारी की घोषणा नहीं की है, लेकिन प्रदर्शन का आंशिक असर रेल सेवाओं पर पड़ सकता है। कुछ रूटों पर ट्रेनों के विलंब, स्टेशन पर भीड़ या प्रदर्शन की स्थिति बन सकती है। यात्रियों को यात्रा से पहले अपने मार्ग की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।

केरल में राज्य परिवहन मंत्री के बी गणेश कुमार ने कहा है कि केएसआरटीसी की बसें सामान्य रूप से चलेंगी क्योंकि उन्हें हड़ताल की कोई सूचना नहीं मिली है। लेकिन ट्रेड यूनियनों ने मंत्री के बयान को खंडन करते हुए दावा किया है कि हड़ताल की जानकारी पहले ही दे दी गई थी और बस सेवा से जुड़े कर्मचारी आंदोलन में भाग लेंगे।

हड़ताल में शामिल संगठनों ने केंद्र सरकार की नीतियों को मजदूरों, किसानों और युवाओं के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण, संविदा प्रणाली का विस्तार, बेरोजगारी, नई श्रम संहिताएं और अग्निपथ योजना जैसी नीतियां देश की सामाजिक संरचना और आर्थिक सुरक्षा को कमजोर कर रही हैं।

प्रदर्शनकारी संगठनों ने केंद्र सरकार के समक्ष नौ प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें चार नई श्रम संहिताओं को वापस लेने, युवाओं के लिए रोजगार सृजन और सरकारी रिक्तियों को भरने, 26,000 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने और 8 घंटे कार्यदिवस की गारंटी देने जैसी मांगें शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने मनरेगा योजना को शहरी क्षेत्रों तक विस्तारित करने, अग्निपथ योजना रद्द करने, हड़ताल और यूनियन गठन के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की भी मांग की है।

कई राज्यों में किसानों और मजदूरों द्वारा सड़क जाम, प्रदर्शन और सभा आयोजित करने की योजना बनाई गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस हड़ताल का असर देखा जा सकता है। प्रदर्शनकारी संगठनों ने साफ किया है कि जब तक केंद्र सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती, तब तक विरोध जारी रहेगा।

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