झुंझुनूं: जिले में अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस अधीक्षक बृजेश ज्योति उपाध्याय ने साफ शब्दों में कहा है कि अब केवल रिपोर्ट दर्ज कर खानापूर्ति से काम नहीं चलेगा, बल्कि अपराधों को जड़ से खत्म करने के लिए पुलिस को जमीन पर दिखना होगा। उन्होंने कहा कि जनता के साथ सम्मानजनक व्यवहार कर उनके विश्वास को बनाए रखना पुलिस की पहली जिम्मेदारी है।
मंगलवार को पुलिस लाइन के सभागार में आयोजित क्राइम मीटिंग को संबोधित करते हुए उपाध्याय ने जिले भर के सभी वृताधिकारियों, थानाध्यक्षों और विशेष इकाइयों के अधिकारियों से अपराधों की वर्तमान स्थिति, लंबित मामलों और जांच की प्रगति पर विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराधों की विवेचना में गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जाए, ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके और पुलिस की छवि मजबूत हो।
इस बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महिला अपराध एवं विशेष अनुसंधान इकाई हेमंत कुमार और अपर पुलिस अधीक्षक मुख्यालय देवेंद्र सिंह राजावत सहित सभी थाना प्रभारियों ने अपने-अपने क्षेत्र की अपराध स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत की। बैठक में महिला व बाल अपराधों में बढ़ोत्तरी पर गहरी चिंता जताई गई। पुलिस अधीक्षक ने निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई की जाए, पीड़िताओं की काउंसलिंग कराई जाए और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो।
पुलिस अधीक्षक ने वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी तेज करने, हिस्ट्रीशीटरों पर सतत निगरानी रखने और संपत्ति से जुड़े अपराधों की गहनता से जांच कर उन्हें सुलझाने पर जोर दिया। इसके साथ ही थानों में वर्षों से खड़े जब्तशुदा वाहनों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश भी जारी किए गए।
सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की समीक्षा करते हुए उपाध्याय ने शराब पीकर वाहन चलाने वालों, काली फिल्म लगी गाड़ियों, बिना हेलमेट दोपहिया चलाने वालों और तेज आवाज वाले “गाटर व साइलेंसर” लगे वाहनों के विरुद्ध सख्त अभियान चलाने को कहा। उन्होंने गश्त को प्रभावी बनाने और संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने के भी निर्देश दिए।
तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए उपाध्याय ने साइबर ठगों पर कड़ी निगरानी रखने, आमजन को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने और साइबर सेल की सक्रियता बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले में नशे के कारोबार, अवैध हथियारों, जुआ-सट्टा और अवैध शराब के खिलाफ “शून्य सहनशीलता” की नीति अपनाई जाए। ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक के दौरान कानून व्यवस्था से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। उपाध्याय ने अधिकारियों को स्पष्ट संकेत दिया कि अब कार्यप्रणाली में दिखावे की जगह ठोस और संवेदनशील कार्रवाई होनी चाहिए, जिससे आमजन खुद को सुरक्षित महसूस करे।