पिलानी, 10 जुलाई: नागौर जिले के बड़ी खाटू कस्बे में स्थित अखिल भारतीय कबीर मठ सदगुरु कबीर आश्रम सेवा संस्थान द्वारा आगामी 11 जुलाई को एक ऐतिहासिक आयोजन होने जा रहा है। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में झुंझुनूं जिले के सामाजिक कार्यों में सक्रिय भामाशाह और समाजसेवी रोहित कुमार विश्व शांति संत कबीर कीर्ति स्तंभ का शिलान्यास करेंगे। इस ऐतिहासिक पहल को देश में पहली बार संत कबीर के नाम पर विश्व शांति की प्रतीकात्मक संरचना के रूप में देखा जा रहा है।
आयोजन की अगुवाई कबीर मठ के महंत नानक दास कर रहे हैं, जिनके प्रयासों से यह महत्त्वाकांक्षी परियोजना आकार ले रही है। कार्यक्रम के दौरान रोहित कुमार को सामाजिक सेवाओं और मानवीय कार्यों के लिए प्रतिष्ठित कबीर कोहिनूर अवार्ड 2025 से भी सम्मानित किया जाएगा।
इस विशेष आयोजन में देशभर के विभिन्न धर्मों के आध्यात्मिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। इनमें उत्तर प्रदेश से कल्कि पीठ के आचार्य प्रमोद कृष्णम, कुरुक्षेत्र से स्वामी संपूर्णानंद, उत्तर प्रदेश से बौद्ध धर्म गुरु भंते प्रज्ञासार और मौलाना कौकब मुजक्वा, दिल्ली से जैन धर्म गुरु विवेक मुनि, मुंबई से महामंडलेश्वर स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती और पद्मश्री सम्मानित हिम्मताराम भाम्भू जैसे प्रमुख नाम शामिल रहेंगे। इन सभी संतों और आध्यात्मिक गुरुओं की उपस्थिति में यह कीर्ति स्तंभ शांति, समरसता और सामाजिक सद्भाव का संदेश देगा।
विश्व शांति संत कबीर कीर्ति स्तंभ का निर्माण बड़ी खाटू रेलवे स्टेशन परिसर में किया जाएगा। इस अवसर पर देशभर से संत शिरोमणि, समाजसेवी, विद्वान, और श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होंगे। आयोजन समिति ने बताया कि यह स्तंभ भारत की आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
गौरतलब है कि रोहित कुमार ने बीते कई वर्षों से समाजसेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बना रखा है। वे विभिन्न सामाजिक, शैक्षिक और जनकल्याणकारी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बार सम्मानित हो चुके हैं। उनकी संस्था के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम के अंत में सभी संतों और गणमान्य जनों द्वारा महंत नानक दास के समर्पित प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया जाएगा। आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि यह स्तंभ न केवल संत कबीर की शिक्षाओं का प्रतीक होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत भी बनेगा।