जोधपुर, राजस्थान: राजस्थान के जोधपुर जिले के कांकाणी क्षेत्र में 26 वर्ष पूर्व हुए काले हिरणों के शिकार का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस क्षेत्र में बिश्नोई समाज द्वारा बनाए गए काले हिरण स्मारक ने आजकल पर्यटकों का ध्यान आकर्षित कर लिया है। यहां देशी-विदेशी पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं और स्मारक के सामने फोटो और सेल्फी लेते दिखाई देते हैं। इस ऐतिहासिक स्थल पर स्थानीय गाइड पर्यटकों को काले हिरण के शिकार से जुड़ी घटनाओं और सलमान खान-लॉरेंस बिश्नोई की दुश्मनी की कहानी भी सुनाते हैं, जिसे पर्यटक उत्सुकता से सुनते हैं।
बिश्नोई समाज के लिए विशेष महत्व रखते हैं काले हिरण
काले हिरण बिश्नोई समाज के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। बिश्नोई समाज इन्हें देवता मानता है और इनकी रक्षा के लिए समर्पित रहता है। स्थानीय गाइड्स पर्यटकों को बताते हैं कि 26 साल पहले काले हिरण का शिकार हुआ था, जिसका आरोप अभिनेता सलमान खान और उनके सहकलाकारों पर लगा था। समाज के लोगों ने इस स्थल को स्मारक में बदलकर हिरणों के प्रति अपने सम्मान को जीवंत रखा है।
लॉरेंस बिश्नोई और सलमान खान की विवादित कहानी
कांकाणी के इस स्मारक में जहां एक ओर पर्यटक काले हिरणों को श्रद्धांजलि देते हैं, वहीं दूसरी ओर वे सलमान खान और लॉरेंस बिश्नोई के बीच के विवाद के बारे में भी जानकारी प्राप्त करते हैं। लॉरेंस बिश्नोई, जो स्वयं बिश्नोई समाज से आते हैं, ने सलमान खान को जान से मारने की धमकी दी थी। गाइड्स पर्यटकों को बताते हैं कि यह धमकी सलमान खान के शिकार से जुड़ी है और समाज के हर युवा में इस घटना को लेकर आज भी आक्रोश है।
काले हिरण शिकार मामला: सलमान खान पर लगे आरोपों की पुनः चर्चा
1998 में “हम साथ-साथ हैं” फिल्म की शूटिंग के दौरान, सलमान खान और अन्य फिल्मी सितारों पर काले हिरणों का शिकार करने का आरोप लगा था। यह मामला उस समय विवादों में आया था, जब सलमान खान के खिलाफ तीन मामले दर्ज हुए और उन्हें दो मामलों में पांच-पांच साल की सजा तथा एक अन्य मामले में एक साल की सजा सुनाई गई। काले हिरण के शिकार और अवैध हथियार के मामलों के कारण यह प्रकरण सलमान खान के लिए वर्षों से गंभीर बना हुआ है।
पर्यटकों के बीच बढ़ रही स्मारक की लोकप्रियता
बिश्नोई समाज द्वारा बनाए गए इस स्मारक पर न केवल बिश्नोई समाज बल्कि अन्य धर्मों और देशों के लोग भी पहुंच रहे हैं। यहां आने वाले पर्यटक इस स्थल पर श्रद्धा और आस्था के साथ समय व्यतीत करते हैं। स्मारक के पास फोटो खिंचवाने के अलावा, वे यहां की ऐतिहासिक घटनाओं को भी जानने में रुचि लेते हैं।