चिड़ावा: उपखंड के सेहीकलां गांव स्थित प्राचीन शिवालय मंदिर में आयोजित शिव महापुराण कथा के सातवें दिन कथा के उपसंहार पर कथा व्यास वाणी भूषण पंडित प्रभुशरण तिवाड़ी ने गूढ़ आध्यात्मिक ज्ञान प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह सम्पूर्ण सृष्टि शिव तत्व से ही निर्मित है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मा, विष्णु और रूद्र तीनों उसी परम् शिव के विभिन्न स्वरूप हैं, जो निर्माण, पालन और संहार के रूप में कार्य करते हैं। उन्होंने बताया कि जो कुछ भी इस जगत में दिखता है, वह सब उसी शिव तत्व का अंश है।
तिवाड़ी ने श्रोताओं से कहा कि प्रत्येक मनुष्य को अपने दायित्व का समर्पण के साथ पालन करते हुए, सेवा और ईश्वर स्मरण को जीवन का मार्ग बनाना चाहिए। यही धर्म है और यही मोक्ष की ओर अग्रसर होने का साधन। इस अवसर पर शिव महापुराण में वर्णित शिव पूजन की प्राचीन विधियों का भी वर्णन किया गया। कथा में स्वर्ग-नरक के कारणों, विभिन्न पौराणिक प्रसंगों और शिव पार्वती के विवाह, तप, त्याग जैसे अनेक प्रेरणादायक प्रसंगों का जीवंत वर्णन किया गया।
कथा के दौरान भगवान शिव और माता गौरा की जीवंत झांकी प्रस्तुत की गई, जिसे श्रद्धालुओं ने भावविभोर होकर निहारा। साथ ही भजन संध्या में प्रस्तुत किए गए सुमधुर भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत यजमान संदीप शर्मा द्वारा की गई, जिन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आचार्य सियाराम शास्त्री के सान्निध्य में शिव महापुराण व व्यास पीठ का विधिवत पूजन किया। इस अवसर पर मंच पर अरविन्द शर्मा, राकेश कुमार, बुद्धिधर कुलहरी, पवन शर्मा, संदीप शर्मा, जितेंद्र जांगीड़, मनोज नाय, अशोक शर्मा, हजारीलाल शर्मा, गजाननंद शर्मा, शिवलाल शर्मा, बिहारीलाल शर्मा, नन्दलाल स्वामी, रवि वर्मा, रतिराम महरिया, संतोष सिंह शेखावत, बाबूलाल शर्मा, जगदीश बड़सरा, श्रीचंद पूनिया, डॉ जगदीश शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला-पुरुष उपस्थित रहे।
सेहीकलां में आयोजित यह धार्मिक आयोजन क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का केन्द्र बन गया है। कथा स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रद्धा के साथ पहुंच रहे हैं।