तियानजिन: चीन का बंदरगाह शहर तियानजिन अगले दो दिनों तक अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का केंद्र बना रहेगा। यहां शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है, जहां भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक मंच पर नजर आएंगे। इस बहुपक्षीय सम्मेलन के इतर होने वाली द्विपक्षीय मुलाकातें भारत के लिए बेहद अहम मानी जा रही हैं।
मोदी-शी मुलाकात से क्या बदलेगा समीकरण?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग रविवार को दो दौर की बैठक करेंगे। यह मुलाकात इसलिए खास है क्योंकि 2020 में गलवान घाटी में हुए संघर्ष और LAC विवाद के बाद भारत-चीन संबंध बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। हालांकि, पिछले साल कजान में हुई उनकी मुलाकात के बाद रिश्तों में बर्फ पिघलती दिखी थी। इस बार दोनों नेता ट्रंप की व्यापार नीतियों से पैदा हुए वैश्विक आर्थिक संकट के बीच सहयोग को नए सिरे से परिभाषित कर सकते हैं।
पुतिन से मुलाकात: रूस-भारत ऊर्जा साझेदारी पर फोकस
सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलेंगे। यह बैठक खासकर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका ने हाल ही में भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर दबाव बढ़ाया है। वॉशिंगटन के कड़े रुख के बावजूद भारत और रूस ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं। यह मुलाकात अमेरिका को एक सीधा संदेश मानी जा रही है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखेगा।
ट्रंप की पॉलिसी से बदल रहा एशिया का समीकरण
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ और आक्रामक अमेरिकी व्यापार नीति ने भारत और चीन दोनों को झटका दिया है। यही वजह है कि लंबे समय से दूर चल रहे मोदी और शी जिनपिंग अब फिर से संवाद बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि एक साझा चुनौती यानी अमेरिका का दबाव, भारत और चीन को नजदीक ला सकता है।
SCO शिखर सम्मेलन से भारत की उम्मीदें
भारत इस सम्मेलन के जरिए न केवल चीन और रूस के साथ रिश्तों को मजबूत करना चाहता है बल्कि एशिया में अपनी कूटनीतिक और रणनीतिक स्थिति भी मजबूत करना चाहता है। प्रधानमंत्री मोदी का शी जिनपिंग और पुतिन के साथ एक मंच पर खड़ा होना खुद में एक बड़ा संकेत है कि भारत किसी दबाव में नहीं झुकेगा।