चिड़ावा: क्षेत्र में जीव दया और मानवीय करुणा की अनूठी मिसाल देखने को मिली, जब बाबा नाथूराम की कुटियाओं में बख्तरपुरा, कंवरपुरा और विजयपुरा गांवों के श्रद्धालुओं ने कुल 127 बोरी अनाज और 29 किलो देसी घी अर्पित किया। सेवा कार्य का उद्देश्य बेजुबान जानवरों की सुरक्षा, पोषण और निरंतर देखभाल के साथ क्षेत्र में सामाजिक सद्भाव और सेवा परंपरा को मजबूत करना रहा।
चिड़ावा के बख्तरपुरा, कंवरपुरा और विजयपुरा स्थित बाबा नाथूराम की कुटियाओं में सेवा भावना के साथ 127 बोरी अनाज और 29 किलो देसी घी सौंपा गया। श्रद्धालुओं द्वारा दी गई सामग्री का उपयोग कुटियाओं में प्रातः और सायंकाल की ज्योत, पशुओं के भरण-पोषण और नियमित सेवा गतिविधियों में किया जाएगा।
कुटिया से जुड़े लोगों का कहना है कि यहां वर्षों से घायल, बीमार, बेघर और असहाय जानवरों की देखभाल की जाती है। भोजन, दवाइयों और आश्रय की व्यवस्था के लिए ग्रामीण लगातार सहयोग करते आए हैं।
सेवा कार्य से जुड़े ग्रामीणों ने बताया कि बाबा नाथूराम की कुटियाओं में यह व्यवस्था किसी आयोजन विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि निरंतर वर्षभर चलती रहती है। श्रद्धालुओं ने कहा कि सेवा का यह कदम गांवों में करुणा, सामाजिक चेतना और जीव मात्र के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देता है।
स्थानीय लोगों ने सेवा कार्य में शामिल बख्तरपुरा, विजयपुरा और कंवरपुरा गांव के युवाओं, बुजुर्गों और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को सराहा, साथ ही आगे भी नियमित सहयोग का संकल्प लिया।
सेवा आयोजन से जुड़े श्रद्घालुओं ने अनाज और देसी घी अर्पित करने वाले सहयोगकर्ताओं को धन्यवाद देते हुए कहा कि कुटिया में चल रही जीव सेवा तभी लगातार संभव है जब समुदाय मिलकर योगदान देता रहे।
उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों में और भी लोग आगे बढ़कर बेजुबानों की सेवा अभियान से जुड़ेंगे और जीव दया को जन आंदोलन का स्वरूप देंगे।





