चिड़ावा: वार्ड 38 में पेयजल संकट दिनों-दिन गंभीर होता जा रहा है। बोरवेल को आबादी से हटाकर खाली प्लॉटिंग क्षेत्र में स्थापित किए जाने के विरोध में स्थानीय निवासी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। तीसरे दिन भी अनिश्चितकालीन धरना जारी रहा, जहां लोगों ने इसे पानी लूट का मामला बताते हुए कठोर कार्रवाई की मांग की।

वार्ड 38 के लोगों ने आरोप लगाया कि स्वीकृत बोरवेल को एक निजी प्रॉपर्टी डीलर ने अपनी प्लॉटिंग के लाभ के लिए आबादी वाले क्षेत्र से हटाकर सुनसान प्लॉटिंग ज़ोन में बनवा दिया, जहां आसपास कोई बस्ती मौजूद नहीं है। इस फैसले के बाद पूरी वार्ड में पानी का दबाव कम हो गया और कई मोहल्लों में सप्लाई बंद जैसी स्थिति बन गई। लोगों ने इसे स्थानीय प्रशासन की बड़ी लापरवाही और पेयजल विभाग की उदासीनता बताया।

निवासियों ने बोरवेल विवाद पर उच्च स्तरीय जांच, स्वीकृत स्थान पर तत्काल पुनर्स्थापन और जिम्मेदार अधिकारियों व संबंधित व्यक्ति पर कार्रवाई करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं मिलता, धरना किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं किया जाएगा।

धरने के तीसरे दिन मंगेश भगत, अरविंद भगत, कैलाश भगत, ओपी वर्मा, बनवारीलाल विद्यार्थी, मंगलचंद कुमावत, संजय कुमावत, प्रसादीराम भगत, माडूराम बरवड़, विशाल वर्मा, तनसुख नायक, धर्मवीर स्वामी, जगदीश नायक, बब्बू, पवन बाड़ेटीया, सुमित चेजारा, राजू, गन्नू और मुकेश कुमावत सहित कई वार्डवासी मौजूद रहे। इन सभी ने कहा कि वार्ड की जनता कई दिनों से पानी पाने के लिए संघर्ष कर रही है और प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि बोरवेल को मूल स्थान पर वापस नहीं लगाया गया तो आने वाले समय में वार्ड के कई हिस्सों में पेयजल संकट स्थायी रूप से गहरा जाएगा।

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