सीकर: शेखावाटी विश्वविद्यालय परिसर में छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने जोरदार प्रदर्शन किया। ‘कैंपस में आपातकाल’ बैनर तले किए गए इस आंदोलन में एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा के पुतलों की प्रतीकात्मक यात्रा निकालने के बाद जलाकर विरोध जताया।

एबीवीपी इकाई अध्यक्ष विकास गुर्जर के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में छात्रों ने मांग की कि राजस्थान की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2023 में छात्रसंघ चुनावों पर रोक लगाकर कैंपस के लोकतांत्रिक ढांचे को खत्म करने का कार्य किया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि छात्रसंघ चुनावों को रोककर छात्र राजनीति की जड़ें काटने का प्रयास किया गया, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रांत मंत्री अभिनव सिंह ने कहा कि अशोक गहलोत सरकार ने चुनाव रद्द करके लोकतंत्र को कमजोर किया, और अब सोशल मीडिया के माध्यम से चुनाव करवाने की बातें कर छात्रों को भ्रमित कर रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया और बताया कि एबीवीपी इस कदम का हर स्तर पर विरोध करती रहेगी।

इकाई मंत्री रमेश भींचर ने बताया कि छात्रसंघ चुनाव बहाली को लेकर सरकार को बार-बार चेताया गया है, लेकिन मांगों की अनदेखी के चलते आज मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ा। उनका कहना था कि छात्र राजनीति लोकतंत्र की नींव है और उसका हनन छात्रों के अधिकारों का हनन है।

जिला संयोजक दीपिका भारद्वाज और विशेष आमंत्रित सदस्य संदीप सेवदा ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव केवल नेतृत्व चुनने का माध्यम नहीं, बल्कि युवाओं के नेतृत्व कौशल को विकसित करने की पहली सीढ़ी है। उन्होंने कहा कि विधानसभा और संसद में जो नेता आज बैठे हैं, वे भी छात्र राजनीति से निकले हैं और आज के छात्रों को वह अवसर नहीं देना देश के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए खतरा है।

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ता शामिल हुए। इनमें प्रमुख रूप से विभाग संयोजक उत्तम चौधरी, अभिषेक पचार, सतेंद्र योगी, नितेश शर्मा, अभय प्रताप सिंह, अभिजीत सिंह, तेजकरण, राजवीर, अक्षत तिवाड़ी, अमित पारीक, कृष्ण सेवदा, नितेश खाकोली, अंकित चाहर, हेमंत, सतवीर, रेणुका, कुसुम और योगिता मौजूद रहे।

एबीवीपी ने स्पष्ट किया कि अगर जल्द ही छात्रसंघ चुनाव बहाल नहीं किए गए तो यह आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। छात्र नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को दबाने वाले किसी भी प्रयास का विरोध किया जाएगा, और सरकार को छात्रों की आवाज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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