मंड्रेला: नगर के वार्ड 18 और 19 के लोगों का आक्रोश शुक्रवार को तब फूट पड़ा, जब अटल प्रगति पथ के नालों का पानी इन जलभराव ग्रस्त इलाकों में छोड़ा जाने लगा। पहले से ही बारिश के मौसम में जलभराव और कीचड़ से परेशान रहवासी इस फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतर आए और काम रुकवा दिया। नाराज लोगों ने प्रशासन और स्थानीय नेतृत्व के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
गुस्साए लोगों ने कहा कि वे पिछले 30 सालों से गंदे पानी और कीचड़ में रहने को मजबूर हैं। हर साल बरसात में उनके घरों में पानी घुस जाता है, जिससे सामान खराब हो जाता है और बीमारियों का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में अटल प्रगति पथ का पानी यहां छोड़ना उनकी तकलीफों को और बढ़ा देगा।
लोगों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने यह निर्णय वापस नहीं लिया तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। स्थानीय नागरिकों ने मंड्रेला बंद और आने वाले चुनावों के बहिष्कार तक की बात कह दी। विरोध कर रहे लोगों ने कहा कि यदि मजबूरी में इस पानी को छोड़ा गया तो वे हिंसक विरोध करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
पूर्व वार्ड पंच महेंद्र भार्गव और निसार खां ने बताया कि बरसों से इस समस्या को लेकर प्रशासन से गुहार लगाई जा रही है, लेकिन आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। नेता चुनाव से पहले झूठे वादे करके चले जाते हैं और बाद में कोई मुड़कर नहीं देखता।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि जलदाय विभाग की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर कई वर्षों से जलभराव और कीचड़ की स्थिति बनी हुई है। बरसात के दिनों में यह मार्ग पूरी तरह से जलमग्न हो जाता है, जिससे स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को आवाजाही में काफी कठिनाई होती है।
वार्ड निवासी बताते हैं कि इस मार्ग की मरम्मत और जल निकासी व्यवस्था को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई, लेकिन समाधान के बजाय समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। लोगों का आरोप है कि नगर प्रशासन ने नालों की सफाई और निकासी की दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
गांव के एक भामाशाह ने पानी निकासी के लिए पिलानी बाइपास पर अपनी निजी जमीन देने की स्वीकृति भी दी थी, लेकिन उस दिशा में भी कोई काम शुरू नहीं किया गया। लोगों का कहना है कि जब समाधान के लिए संसाधन उपलब्ध हैं तो फिर प्रशासन जानबूझकर उन्हें कीचड़ और गंदगी में रहने पर क्यों मजबूर कर रहा है।
इस पूरे मामले पर जब सार्वजनिक निर्माण विभाग के कनिष्ठ अभियंता सिकंदर बुडानिया से ग्रामीणों ने बात की, तो पहले उन्होंने “जन सुनवाई में व्यस्त हूं” कहकर फोन काट दिया। जब ग्रामीणों ने कहा कि यही तो जनसुनवाई है, तब जेईएन ने बताया कि उन्हें कार्यभार संभाले अभी दस दिन ही हुए हैं और वे दोपहर तक मौके पर पहुंचेंगे। लेकिन दोपहर तक कोई नहीं आया। बाद में जब दोबारा फोन किया गया तो उन्होंने शनिवार सुबह आने का आश्वासन दिया।
नाराज लोगों ने चेताया है कि अगर प्रशासन ने जल्द ही अटल प्रगति पथ के नालों का पानी वार्ड में छोड़ने का फैसला वापस नहीं लिया और 30 साल पुरानी जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन तेज करेंगे और सरकार को आगामी चुनावों में इसका जवाब देंगे।