खेतड़ी: बेटी की जान आंधी ने ली और मां की जान चिकित्सकों की लापरवाही ने!

खेतड़ी: देर रात आई आंधी ने एक परिवार पर कहर बरपाया। पेड़ टूटकर घर के बाहर सो रहे परिवार पर गिर गया, जिससे एक 11 साल की बच्ची की मौत हो गई और उसकी मां गंभीर रूप से घायल हो गई।

घटना का विवरण:

चुरू जिले के उदासर निवासी प्रदीप कुमार मीणा अपनी पत्नी सावित्री और तीन बच्चों के साथ खेतड़ी के बांसियाल गांव में रहते थे। गुरुवार रात वे सभी घर के बाहर सो रहे थे। तभी रात करीब साढ़े 9 बजे तेज हवाओं के साथ आंधी आई। तेज हवा के साथ घर के पास खड़े खेजड़ी के पेड़ का एक हिस्सा टूटकर उनके ऊपर गिर गया।

इस हादसे में 11 साल की बेटी काजल की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सावित्री गंभीर रूप से घायल हो गईं। प्रदीप व गांव वालों ने पायल एवं सावित्री को तुरंत खेतड़ी के राजकीय उप जिला अस्पताल में पहुंचाया। जहां उपस्थित चिकित्सकों ने पायल को मृत घोषित कर दिया जबकि प्राथमिक उपचार के बाद सावित्री की गंभीर हालत को देखते हुए झुंझुनूं रेफर कर दिया गया। जहां इलाज के दौरान उसने भी दम तोड दिया।

गांव वालों ने लगाया लापरवाही का आरोप

सावित्री की मौत पर ग्रामीणों ने खेतड़ी उप जिला अस्पताल के रात्रिकालीन उपस्थित चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाया। ग्रामीणों का आरोप है कि हादसे के बाद वे सावित्री को रात करीब साढ़े 10 बजे अस्पताल लेकर पहुंचे थे। लेकिन उपस्थित स्टाफ ने रात एक बजे तक उसे नही संभाला, हालत गंभीर होने पर रात्रि एक बजे उसे झुंझुनू रेफर कर दिया, जहां उसकी मौत हो गई।

धरना प्रदर्शन की चेतावनी, प्रशासन मौके पर पहुंचा

सावित्री की मौत का कारण चिकित्सकों की लापरवाही बताते हुए ग्रामीण खेतड़ी उप जिला अस्पताल में धरने पर बैठ गए। मामले को बिगड़ता देख प्रशासन की तरफ से एसडीएम सविता शर्मा, सीएमएचओ डॉक्टर विनय गहलोत , बीसीएमओ डॉक्टर हरीश यादव मौके पर पहुंचे तथा खेतड़ी, मेहाडा, खेतड़ी नगर, व बबाई थानों का पुलिस जाब्ता भी मौके पर बुलाया गया।

मांगों पर सहमति के बाद हुआ पोस्टमार्टम

सावित्री की मौत पर उठे बवाल पर प्रशासन व ग्रामीणों के बीच मैंगो पर सहमति बनने पर पोस्टमार्टम करवाया गया। डॉक्टर के खिलाफ लापरवाही बरतने के आप पर सीएमएचओ डॉक्टर विनय गहलोत की ओर से कमेटी का गठन किया गया। कमेटी द्वारा जो भी कर्मचारी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा पीड़ित परिवार को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता देने के बाद पर भी सहमति बनी।

परिवार पर दुखों का पहाड़:

इस हादसे से प्रदीप कुमार मीणा के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उन्होंने बताया कि वह तीन दिन पहले ही बांसियाल में खेती करने के लिए अपने गांव से परिवार के साथ आया था।

यह हादसा दर्शाता है कि आंधी-तूफान कितने खतरनाक हो सकते हैं। हमें इन प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए हमेशा सतर्क रहना चाहिए।

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