झुंझुनूं: राजस्थान के शिक्षा जगत के लिए 5 सितंबर 2025 का दिन खास होने वाला है। शिक्षक दिवस के अवसर पर जयपुर के बिरला ऑडिटोरियम में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय (अंग्रेजी माध्यम), ओजटू के वरिष्ठ अध्यापक गजपाल सिंह और महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, डुलानियां के प्राध्यापक दिनेश कुमार पूनिया को सम्मानित किया जाएगा।
गजपाल सिंह का शिक्षण सफर और नवाचार
वरिष्ठ अध्यापक (गणित) गजपाल सिंह ने अपनी सेवा की शुरुआत 26 फरवरी 1997 को सूरजगढ़ स्थित एक अनुदानित विद्यालय से की। वर्ष 2011 में सरकारी सेवा में चयनित होने के बाद से उन्होंने “कार्य ही पूजा है” की उक्ति को सार्थक करते हुए गणित और भौतिक विज्ञान जैसे कठिन विषयों को छात्रों के लिए सरल और रुचिकर बनाया।
उनके प्रयासों से परीक्षा परिणाम हमेशा शत-प्रतिशत रहा और कई छात्रों ने 100 में से 100 अंक प्राप्त किए। आज उनके पढ़ाए हुए कई छात्र प्रशासनिक सेवाओं सहित सरकारी पदों पर कार्यरत हैं।
गजपाल सिंह ने शिक्षा के साथ-साथ विद्यालय विकास में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने भामाशाहों को प्रेरित कर विद्यालय में स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल बोर्ड जैसी आधुनिक सुविधाएँ स्थापित करवाईं। इसके अलावा वे विद्यालय समय के बाद झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देकर समाज सेवा का भी उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।
दिनेश कुमार पूनिया का शिक्षा क्षेत्र में योगदान
महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, डुलानियां में कार्यरत दिनेश कुमार पूनिया शिक्षा और समाज सेवा दोनों क्षेत्रों में हमेशा अग्रणी रहे हैं। उनके नवाचारपूर्ण प्रयासों ने ग्रामीण छात्रों की प्रतिभा को निखारने का काम किया।
उनके मार्गदर्शन में कई छात्रों ने श्रेष्ठ परिणाम दिए, जिससे विद्यालय और क्षेत्र की प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई। संस्था प्रधान राजेंद्र कुमार ने बताया कि यह सम्मान न केवल दिनेश पूनिया के लिए बल्कि पूरे विद्यालय परिवार के लिए गर्व का क्षण है।
कई बार सम्मानित हो चुके हैं दोनों शिक्षक
गजपाल सिंह को जिला स्तर पर 2024 में शिक्षक दिवस पर सम्मानित किया गया था और 2016, 2018, 2020, 2022, 2023 और 2025 में जिला व उपखंड स्तर पर भी उन्हें कई बार सम्मान मिल चुका है। वहीं दिनेश पूनिया को भी शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नवाचारों और योगदान के लिए सम्मानित किया जाता रहा है।
इस बार राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान की चयन प्रक्रिया पहले से अधिक कठोर रही। पिछले वर्षों की तुलना में केवल आधे शिक्षकों को चुना गया, जिससे इस उपलब्धि का महत्व और बढ़ जाता है।





