चिड़ावा: शहीद दिवस के अवसर पर चिड़ावा में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि श्रद्धा, सम्मान और राष्ट्रभक्ति के साथ मनाई गई। किसान भवन में आयोजित कार्यक्रम में सत्य, अहिंसा और लोकतंत्र के प्रणेता महात्मा गांधी के विचारों को स्मरण करते हुए उनके बलिदान को नमन किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक, राजनीतिक और शिक्षाविद् वर्ग की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जहां गांधीजी के सिद्धांतों को आज के समाज के लिए प्रासंगिक बताया गया।
चिड़ावा स्थित किसान भवन में राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के जिलाध्यक्ष विजय मील के नेतृत्व में शहीद दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई और उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम के दौरान आदर्श समाज समिति इंडिया के अध्यक्ष धर्मपाल गांधी ने महात्मा गांधी के जीवन, संघर्ष और सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्व इतिहास में कई महान नेता हुए हैं, लेकिन महात्मा गांधी जैसा सत्य, अहिंसा और मानवता का पुजारी कोई दूसरा नहीं हुआ। उनके विचारों ने भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में नागरिक अधिकारों और स्वतंत्रता आंदोलनों को प्रेरणा दी।
महात्मा गांधी ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका और भारत में कई ऐतिहासिक आंदोलनों का नेतृत्व किया। उन्होंने फिनिक्स आश्रम, टॉलस्टॉय आश्रम, साबरमती आश्रम और सेवाग्राम आश्रम जैसी संस्थाओं की स्थापना कर सामाजिक और राजनीतिक चेतना को नई दिशा दी। उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय आंदोलन ने देश को एकजुट कर स्वतंत्रता की ओर अग्रसर किया।
गांधीजी के विचारों से प्रभावित होकर सुभाष चंद्र बोस, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, महादेव देसाई, जेबी कृपलानी, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, विनोबा भावे, खान अब्दुल गफ्फार खान और जयप्रकाश नारायण जैसे कई स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया।
30 जनवरी 1948 को दिल्ली में महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई थी। वक्ताओं ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि मानवता, सत्य और अहिंसा की हत्या थी। उनकी पुण्यतिथि को हर वर्ष शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।
इस अवसर पर विजय मील, रघुवीर सिंह राजवीरपुरा, बलवीर सैनी, अमित नूनिया, इशांत सहित कई सामाजिक और शिक्षाविद् वर्ग के प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिन्होंने गांधीजी के आदर्शों को अपनाने का संदेश दिया।





