पिलानी: बिरला बालिका विद्यापीठ ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की है। ‘वंदे मातरम्—भारतीय हरित धरोहर’ शीर्षक से प्रकाशित विश्व रिकॉर्ड काव्य संकलन में विद्यालय की छात्राओं और शिक्षिकाओं ने उल्लेखनीय योगदान देकर संस्थान का नाम विश्व पटल पर स्थापित किया है। इस काव्य संग्रह में दुनिया भर के रचनाकारों की 101 कविताओं को शामिल किया गया, जिसमें विद्यालय की 12 छात्राओं और 6 शिक्षिकाओं की सशक्त भागीदारी रही।
रचनात्मक अभिव्यक्ति से जीता वैश्विक मंच
इस उपलब्धि में आशी अग्रवाल, अदिति सिंह, अधा देशवाल, सिद्धि सिंह, अंशिका आनंद, वेदांगी सिंह, लावण्या शर्मा, पीहू मोदी, अदिति यादव, अनन्या बुबना, प्रश्मा कोठारी और अरण्या पारीक जैसी छात्राओं ने अपनी कविताओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और देशभक्ति की भावना को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया। इनकी रचनाओं ने न केवल साहित्यिक गुणवत्ता का परिचय दिया, बल्कि वैश्विक मंच पर भारतीय विचारधारा को मजबूती से रखा।

शिक्षिकाओं के मार्गदर्शन ने दिलाई ऐतिहासिक सफलता
इस उपलब्धि के पीछे शिक्षिकाओं का मार्गदर्शन भी अहम रहा। सावित्री धायल, संध्या व्यास, सुमन शेखावत, निशा पारीक, कल्पना सोनी और निधि शर्मा ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए स्वयं भी काव्य लेखन में भाग लिया। इनके अनुभव और मार्गदर्शन ने इस सामूहिक प्रयास को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
बना विश्व रिकॉर्ड, इंदु नांदल के निर्देशन में साकार हुआ सपना
इस अंतरराष्ट्रीय पहल की प्रेरणा इंडोनेशिया में रह रही भारतीय मूल की इंदु नांदल द्वारा दी गई। उनके निर्देशन में सावित्री धायल ने लगातार दो विश्व रिकॉर्ड पुस्तकों में सह-संपादक की भूमिका निभाई। वहीं कल्पना सोनी ने संपादकीय टीम में सक्रिय भूमिका निभाकर इस परियोजना को सफल बनाने में सहयोग दिया।

विद्यालय प्रशासन ने किया सम्मान, जताया गर्व
विद्यालय की प्राचार्या अचला वर्मा ने सभी प्रतिभागियों को सम्मानित करते हुए इस उपलब्धि को संस्थान के लिए गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने छात्राओं को भविष्य में भी साहित्य, रचनात्मकता और देशभक्ति से जुड़े आयोजनों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
बिरला एजुकेशन ट्रस्ट (BET) के निदेशक मेजर जनरल एस. एस. नायर के मार्गदर्शन और प्रेरणादायी नेतृत्व के चलते संस्थान में रचनात्मक वातावरण विकसित हुआ है, जिससे छात्राएं निरंतर नई उपलब्धियां हासिल कर रही हैं।

मेडल और प्रमाण पत्र से हुआ सम्मान
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को मेडल, प्रमाण पत्र और काव्य संकलन की प्रतियां देकर सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि न केवल विद्यालय के लिए गर्व का विषय है, बल्कि छात्राओं के रचनात्मक कौशल को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम भी साबित हो रही है।




