सूरजगढ़: राष्ट्रगीत “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूर्ण होने पर सूरजगढ़ में राष्ट्रभक्ति का अनूठा माहौल देखने को मिला। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) द्वारा “परिसर वंदे मातरम् अभियान” के अंतर्गत संकल्प आईटीआई परिसर में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने इसे विशेष बना दिया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कुलदीप सिंह जागावत ने कहा कि “वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की अभिव्यक्ति है।” उन्होंने बताया कि यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने का सबसे प्रभावशाली माध्यम बना।
जागावत ने अपने संबोधन में बताया कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1875 में रचित “वंदे मातरम्” 1905 के बंग-भंग आंदोलन के दौरान जन-जन की आवाज बन गया था। अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष में यह गीत क्रांतिकारियों के लिए प्रेरणा स्रोत रहा और अंतिम क्षणों में भी उनके मुख से “वंदे मातरम्” का उद्घोष सुनाई देता था।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खंड कार्यवाह अशोक ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में “वंदे मातरम्” केवल एक नारा नहीं, बल्कि जीवन में अपनाने योग्य संकल्प है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए भारत को विश्वगुरु बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
नगर अध्यक्ष रतन सिंह खरड़िया ने विद्यार्थियों को राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक विरासत और संगठन के महत्व से अवगत कराया और राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी को आवश्यक बताया।
कार्यक्रम का संचालन हेमंत चारण ने किया। इस दौरान प्रवीण शेखावत, हर्षित शर्मा, रवि कुमार, अभिषेक और दिनेश सहित अनेक कार्यकर्ता एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। अंत में सभी ने सामूहिक रूप से “वंदे मातरम्” का उद्घोष करते हुए राष्ट्रभक्ति का संकल्प लिया।





