Friday, February 13, 2026
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राजनीतिक भागीदारी और मूल ओबीसी का मुद्दा गरमाया: झुंझुनूं में कुम्हार-कुमावत समाज ने ओबीसी आयोग को सौंपा ज्ञापन

झुंझुनूं: जिला मुख्यालय पर आयोजित राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान कुम्हार-कुमावत समाज ने राजनीतिक भागीदारी और मूल ओबीसी अधिकारों को लेकर सशक्त आवाज उठाई। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे समाज बंधुओं ने राज्य ओबीसी आयोग के सदस्यों को ज्ञापन सौंपते हुए सामाजिक न्याय, प्रतिनिधित्व और नीति निर्धारण में भागीदारी की मांग रखी।

राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा राजनीतिक प्रतिनिधित्व जनसुनवाई कार्यक्रम में जिलेभर से पहुंचे कुम्हार और कुमावत समाज के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इस दौरान समाज के लोगों ने राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व न मिलने, नीतिगत निर्णयों में उपेक्षा और मूल ओबीसी की पहचान से जुड़े विषयों को प्रमुखता से सामने रखा। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का कहना था कि सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए राजनीतिक सहभागिता बेहद जरूरी है।

कार्यक्रम के दौरान समाज के प्रतिनिधि मंडल ने राज्य ओबीसी आयोग के सदस्य पवन मावंडिया और गोपाल कृष्ण शर्मा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में जिले के विभिन्न इलाकों से आए समाज बंधुओं ने एक स्वर में मांग की कि कुम्हार-कुमावत समाज को राजनीतिक प्रक्रिया में समुचित भागीदारी दी जाए और मूल ओबीसी वर्ग से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाए।

जनसुनवाई में कुम्हार महासभा के जिला अध्यक्ष विनोद कुमावत ने सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी को समय की आवश्यकता बताया। वहीं राजेश कुमावत और बाबूलाल कुमावत ने मूल ओबीसी की पहचान और अधिकारों पर विस्तार से अपनी बात रखी। कर्मचारीगण अध्यक्ष हरिराम और अशोक कुमावत ने प्रशासनिक स्तर पर प्रतिनिधित्व की कमी की ओर ध्यान दिलाया। योगेंद्र कुंडलवाल ने सामाजिक एकजुटता पर जोर दिया, जबकि बार एसोसिएशन अध्यक्ष झुंझुनूं रतन मोरवाल ने संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर अपने सुझाव साझा किए। समाज के अन्य प्रभावशाली सदस्यों ने भी कार्यक्रम में विचार रखते हुए सकारात्मक समाधान की आवश्यकता जताई।

जनसुनवाई कार्यक्रम के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि कुम्हार-कुमावत समाज में अब राजनीतिक चेतना और अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। समाज के लोगों ने उम्मीद जताई कि ओबीसी आयोग उनकी मांगों को गंभीरता से लेकर सरकार तक पहुंचाएगा, ताकि भविष्य में नीति निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

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