महाराष्ट्र: मुंबई नगर निगम चुनाव परिणाम इस बार ऐतिहासिक साबित हुए। करीब ढाई दशक तक महानगर की सत्ता पर काबिज रही शिवसेना (ठाकरे गुट) को हार का सामना करना पड़ा और भाजपा ने यहां निर्णायक नियंत्रण हासिल कर लिया। यह बदलाव सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे शहरी महाराष्ट्र में इसका असर दिखा।
महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव परिणाम: BJP का शहरी दबदबा
मतगणना के आंकड़े बताते हैं कि भाजपा ने मुंबई के साथ-साथ पुणे, नागपुर, नासिक और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे बड़े औद्योगिक और राजनीतिक रूप से अहम शहरों में अपनी पकड़ और मजबूत की है। नवी मुंबई, मीरा-भयंदर, पनवेल और उल्हासनगर जैसे शहरी इलाकों में भी भाजपा का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा। सांगली-मिराज-कुपवाड, कोल्हापुर, सोलापुर, अकोला, अमरावती, धुले, जलगांव, जालना, नांदेड़-वाघाला और छत्रपति संभाजीनगर जैसे नगर निगमों में भी भाजपा का वर्चस्व देखने को मिला। कुल मिलाकर 21 नगर निगमों में भाजपा ने सत्ता पर कब्जा जमाया है।
शिवसेना (शिंदे गुट): ठाणे और कल्याण में पकड़ कायम
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने ठाणे और कल्याण-डोम्बिवली नगर निगमों में अपना दबदबा बरकरार रखा है। ये दोनों इलाके लंबे समय से शिवसेना के मजबूत गढ़ माने जाते रहे हैं, जहां इस बार भी पार्टी को अपेक्षित समर्थन मिला।
कांग्रेस का सीमित प्रदर्शन, सिर्फ तीन नगर निगम
कांग्रेस के लिए यह चुनाव उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। पार्टी को लातूर और भिवंडी-निज़ामपुर में अकेले दम पर सत्ता मिली, जबकि चंद्रपुर नगर निगम में कांग्रेस ने शिवसेना (यूबीटी) के साथ गठबंधन कर सरकार बनाई। इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में कांग्रेस का प्रभाव कमजोर ही नजर आया।
शिवसेना (ठाकरे गुट) को बड़ा झटका
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाला गुट इस चुनाव में सबसे ज्यादा नुकसान में रहा। पार्टी को केवल परभणी नगर निगम में कांग्रेस के समर्थन से सत्ता मिल सकी। मुंबई में सत्ता गंवाना ठाकरे गुट के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
बहुजन विकास अघाड़ी की वापसी ने चौंकाया
वसई-विरार नगर निगम में बहुजन विकास अघाड़ी ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित की है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में असफलता के बाद यह जीत पार्टी के लिए संजीवनी की तरह देखी जा रही है और क्षेत्रीय राजनीति में BVA की प्रासंगिकता को दोबारा स्थापित करती है।
मालेगांव नगर निगम: निर्दलीय बने किंगमेकर
मालेगांव नगर निगम में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में निर्दलीय पार्षद सत्ता की चाबी अपने हाथ में लिए हुए हैं। अब यहां महापौर का चयन पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि निर्दलीय किस राजनीतिक दल को समर्थन देते हैं।
शहरी महाराष्ट्र में BJP की मजबूत पकड़
इन नतीजों से यह स्पष्ट हो गया है कि महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में भाजपा सबसे मजबूत ताकत बनकर उभरी है। मुंबई नगर निगम से लेकर अन्य बड़े शहरों तक, भाजपा ने विपक्ष को रणनीतिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर पीछे छोड़ दिया है।
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