Sunday, August 31, 2025
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मराठी भाषा को लेकर मनसे और ठाकरे गुट का संयुक्त प्रदर्शन: राज ठाकरे ने नेताओं को दिया मीडिया पर चुप रहने का निर्देश, मीडिया बातचीत पर लगाई रोक, सोशल मीडिया पर भी रोक लगाने के निर्देश

मुंबई: महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर छिड़ी राजनीतिक जंग के बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और ठाकरे गुट ने संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शनों की श्रृंखला शुरू कर दी है। इसी क्रम में मंगलवार को मीरा-भायंदर क्षेत्र में दोनों दलों ने एक साथ विरोध प्रदर्शन किया। मराठी बनाम अमराठी बहस को लेकर जहां राजनीतिक माहौल गरम है, वहीं संभावित गठबंधन की चर्चाओं को लेकर भी स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।

इन परिस्थितियों को देखते हुए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने पार्टी नेताओं को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि वे बिना अनुमति किसी भी प्रकार के मीडिया से संवाद न करें। राज ठाकरे ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह जानकारी देते हुए कहा कि पार्टी के किसी भी पदाधिकारी या कार्यकर्ता को समाचार पत्र, टीवी चैनल या डिजिटल मीडिया से बातचीत की अनुमति नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तरह की प्रतिक्रिया या वीडियो सोशल मीडिया पर साझा नहीं किए जाएं।

राज ठाकरे ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन प्रवक्ताओं को मीडिया से बातचीत की जिम्मेदारी दी गई है, वे भी बिना पूर्व अनुमति के कोई बयान न दें और न ही कोई व्यक्तिगत टिप्पणी सोशल मीडिया पर साझा करें। इस निर्देश के पीछे संभावित गठबंधन को लेकर उभरी बयानबाजी को कारण माना जा रहा है।

हाल ही में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे वर्ली में एक कार्यक्रम के दौरान एक मंच पर दिखाई दिए थे, जिसके बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। कुछ कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं ने संभावित गठबंधन को लेकर बयान भी दिए थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज ठाकरे का यह सख्त निर्देश उन्हीं अटकलों और बयानों पर नियंत्रण स्थापित करने की रणनीति हो सकती है।

मराठी भाषा को लेकर राज्य में चल रही बहस और राजनीतिक आंदोलनों में मनसे की सक्रियता बढ़ी है। मनसे नेताओं का रुख मराठी स्वाभिमान को लेकर आक्रामक बना हुआ है, और पार्टी इस मुद्दे पर व्यापक जन समर्थन जुटाने की कोशिश में है। इस पृष्ठभूमि में पार्टी नेतृत्व की ओर से मीडिया बातचीत पर रोक लगाने का फैसला राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राज्य की राजनीति में मनसे और ठाकरे गुट की बढ़ती नजदीकियां भविष्य में गठबंधन की दिशा में कोई ठोस कदम बन सकती हैं, लेकिन फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। दूसरी ओर, मराठी बनाम अमराठी मुद्दे पर दोनों दलों की एकजुटता ने राज्य की राजनीति में नया समीकरण तैयार कर दिया है।

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