नई दिल्ली: भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक ऐसी ऐतिहासिक छलांग लगाई है, जिसने वैश्विक सैन्य शक्तियों को चौंका दिया है। स्वदेशी ड्रोन-रोधी प्रणाली भार्गवास्त्र के साथ भारत अब दुनिया का एकमात्र ऐसा देश बन गया है, जिसके पास एक साथ 64 माइक्रो-मिसाइलें दागने की क्षमता वाला मोबाइल सिस्टम मौजूद है। यह सिस्टम ड्रोन स्वार्म अटैक जैसे आधुनिक और सस्ते खतरों को पलक झपकते ही खत्म करने में सक्षम है, जिससे भारत की हवाई सुरक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है।
क्या है भार्गवास्त्र और क्यों है यह गेमचेंजर?
भार्गवास्त्र एक पूरी तरह स्वदेशी ड्रोन-रोधी हथियार प्रणाली है, जिसे महाराष्ट्र के नागपुर स्थित सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड द्वारा विकसित किया गया है। यह सिस्टम सोलर ग्रुप की सहायक इकाई इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड द्वारा डिजाइन और निर्मित किया गया है। मई 2025 में ओडिशा के गोपालपुर में इसके सफल परीक्षण किए गए थे, जिनमें इसकी अभूतपूर्व मारक क्षमता साबित हुई।
10 सेकंड में 64 मिसाइलें: दुनिया में पहली बार
भार्गवास्त्र की सबसे बड़ी ताकत इसकी साल्वो मोड क्षमता है। यह सिस्टम मात्र 10 सेकंड के भीतर 64 माइक्रो-मिसाइलें या रॉकेट एक साथ दाग सकता है। वैश्विक स्तर पर मौजूद अन्य आधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम एक बार में अधिकतम चार मिसाइलें दागने में ही सक्षम हैं, जबकि भार्गवास्त्र इस मामले में कई गुना आगे निकल चुका है।
दो-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली से ड्रोन झुंड का खात्मा
भार्गवास्त्र दो स्तरों पर काम करता है। पहले स्तर में अनगाइडेड माइक्रो-रॉकेट्स का उपयोग किया जाता है, जो करीब 20 मीटर के क्षेत्र में मौजूद ड्रोन झुंड को एक साथ नष्ट कर देते हैं। दूसरे स्तर में अत्यंत सटीक गाइडेड माइक्रो-मिसाइलें शामिल हैं, जो अलग-अलग टारगेट को पहचानकर खत्म करती हैं। यह सिस्टम 6 से 10 किलोमीटर दूर से ही ड्रोन की पहचान कर लेता है और 2.5 किलोमीटर की दूरी तक उन्हें पूरी तरह तबाह कर सकता है।
कम लागत, ज्यादा असर: S-400 से भी किफायती समाधान
पारंपरिक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों, जैसे S-400, की तुलना में भार्गवास्त्र की लागत बेहद कम है। यही कारण है कि यह ड्रोन जैसे कम लागत वाले लेकिन खतरनाक हमलों को रोकने के लिए एक अत्यंत किफायती और रणनीतिक समाधान बनकर उभरा है। इससे भारत अपने महंगे मिसाइल डिफेंस सिस्टम को छोटे खतरों से बचा सकता है।
हर इलाके में तैनाती, हर खतरे के लिए तैयार
भार्गवास्त्र को रेगिस्तानी इलाकों से लेकर 5000 मीटर ऊंचाई वाले बर्फीले पहाड़ों तक किसी भी भौगोलिक परिस्थिति में तैनात किया जा सकता है। यह एक पूरी तरह मोबाइल सिस्टम है, जिसे ऑल-टेरेन व्हीकल पर स्थापित किया गया है, जिससे युद्ध क्षेत्र में इसे तेजी से कहीं भी पहुंचाया जा सकता है।
चीन-पाकिस्तान ड्रोन खतरे पर भारत की सख्त तैयारी
पड़ोसी देशों द्वारा ड्रोन तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए भार्गवास्त्र भारत की रक्षा पंक्ति को अभेद्य बनाता है। इसकी 64 मिसाइलें एक साथ हमला कर किसी भी बड़े ड्रोन स्वार्म अटैक को विफल करने की क्षमता रखती हैं, जिससे भारत की सामरिक बढ़त और मजबूत हुई है।
रक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया और आत्मनिर्भर भारत
19 जनवरी 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भार्गवास्त्र की सफलता की सराहना करते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत अभियान की एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम न केवल भारत की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की तकनीकी ताकत को भी दर्शाता है।





