चिड़ावा: पिलानी बैंक मैनेजर संगीता मर्डर केस ने अब तूल पकड़ लिया है। बेटी को न्याय दिलाने के लिए एक माँ की दर्दनाक पुकार ने सबको झकझोर दिया है। आज सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने डीएसपी कार्यालय पर प्रदर्शन कर पुलिस पर ढिलाई बरतने का आरोप लगाया और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।
सड़क पर उतरा परिवार, DSP ऑफिस पर धरना
पिलानी में यूको बैंक की मैनेजर संगीता की 25 जुलाई को हुई संदिग्ध मौत के मामले में आज काकोडा़, झाझड़िया की ढाणी और चिड़ावा के विकास नगर से सैकड़ों लोग डीएसपी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए जमकर रोष प्रकट किया। जब डीएसपी विकास धींधवाल कार्यालय में मौजूद नहीं मिले, तो आक्रोशित भीड़ वहीं धरने पर बैठ गई। एक माँ का रो-रोकर बुरा हाल था, जो अपनी बेटी के लिए न्याय की गुहार लगा रही थी।
“शादी के 20 दिन बाद ही ससुराल बन गया था नरक”

संगीता की शादी साल 2018 में पिचानवा निवासी मनोज बराला से हुई थी। 2022 में संगीता ने एक बेटे प्राशिव को जन्म दिया। संगीता की माँ, वीरांगना मुन्नी देवी, ने बिलखते हुए आरोप लगाया कि शादी के महज 15-20 दिन बाद से ही उनके ससुराल वाले उसे परेशान करने लगे थे। उसे अपने पीहर तक नहीं जाने दिया जाता था, और उस पर पैसों के लिए लगातार मानसिक और शारीरिक दबाव बनाया जा रहा था।
90 लाख का लोन और संपत्ति पर थी नजर?
परिवार का आरोप है कि संगीता की मौत के पीछे एक बड़ी वित्तीय साजिश है। पति मनोज बराला ने संगीता के नाम पर करीब 80 से 90 लाख रुपये का गोल्ड लोन और कार लोन ले रखा था। इतना ही नहीं, संगीता के नाम पर मौजूद लाखों रुपये की जमीन और एफडी (FD) भी मनोज ने धोखे से अपने नाम करवा ली। संगीता की माँ का दावा है कि इसी संपत्ति और लोन के बोझ से छुटकारा पाने के लिए उनकी बेटी को जहर देकर मारा गया।
हत्या का दिन: बदले गए कपड़े, जल्दबाजी में अंतिम संस्कार!
परिजनों ने हत्या वाले दिन की घटनाओं पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि:
संगीता को सुबह 10 बजे पिलानी बैंक पहुंचना था, लेकिन ग्यारह बजे तक उसका कोई अता-पता नहीं था।
ड्यूटी पर जाने के लिए उसने जो कपड़े पहने थे, मौत के बाद वे बदल दिए गए थे।
जहर के असर से संगीता का शरीर फूल गया था, जिसके कारण सच छिपाने के लिए आनन-फानन में उसका दाह संस्कार कर दिया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि संगीता की मौत के सिर्फ एक घंटे के भीतर उसके कमरे को पूरी तरह से खाली कर दिया गया, ताकि सबूत मिटाए जा सकें।
पुलिस की ढिलाई पर फूटा गुस्सा
इस पूरे मामले में संगीता के परिजनों ने राजस्थान पुलिस की भूमिका को भी संदिग्ध बताया है। उनका आरोप है कि हत्या की FIR दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है और न ही मुख्य आरोपी से कोई कड़ी पूछताछ की है। इसी ढिलाई के विरोध में परिवार और ग्रामीणों को प्रदर्शन के लिए मजबूर होना पड़ा।
5 दिन का अल्टीमेटम, रिपोर्ट के बाद कार्रवाई का आश्वासन

भारी विरोध के बाद डीएसपी विकास धींधवाल मौके पर पहुंचे। परिजनों और ग्रामीणों ने उन्हें एक ज्ञापन सौंपकर आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर पांच दिनों के भीतर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे एक बड़ा आंदोलन करेंगे। डीएसपी धींधवाल ने परिवार को आश्वासन दिया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आते ही कानून के अनुसार सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ज्ञापन देने वालों में मुन्नी देवी, सूरजगढ़ प्रधान बलवान सिंह, पवन डेला, सुनील भडीया, दीपक बडेसरा, राजेश गजराज, अनूप नेहरा, होशियार गढ़वाल, नितेश लांबा, प्रदीप नेहरा, प्रमोद पूनिया, सुनील डेला काकोड़ा, भुनेश सैनी, सुनीता गजराज, सुनीता जाखड़ सहित सैंकड़ों की संख्या में लोग शामिल रहे।




