नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026 को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। जहां केंद्र सरकार इसे विकासोन्मुखी बजट बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इसे निराशाजनक करार देते हुए आर्थिक विफलताओं की लंबी सूची गिनाई है। कांग्रेस सांसद और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बजट को आर्थिक रणनीति और आर्थिक नेतृत्व दोनों के स्तर पर कमजोर बताया, जबकि जयराम रमेश ने घरेलू बजट में कटौती और बढ़ते कर्ज को गंभीर चिंता का विषय बताया।
वित्त मंत्री ने पेश किया बजट, कांग्रेस ने उठाए सवाल
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को लोकसभा में आम बजट पेश किया। बजट के तुरंत बाद कांग्रेस नेताओं ने प्रेस वार्ता कर सरकार पर हमला बोला। इस दौरान पी. चिदंबरम और जयराम रमेश मौजूद रहे। पी. चिदंबरम ने कहा कि जिसने भी यह बजट भाषण सुना, वह हैरान रह गया, क्योंकि इसमें देश की वास्तविक आर्थिक चुनौतियों पर कोई स्पष्ट दृष्टिकोण नहीं दिखा।
आर्थिक सर्वेक्षण की अनदेखी का आरोप
पी. चिदंबरम ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में बजट केवल आय और व्यय का विवरण नहीं होता, बल्कि उसे देश के सामने खड़ी चुनौतियों का समाधान पेश करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 में जिन समस्याओं की पहचान की गई थी, बजट भाषण में उनका जिक्र तक नहीं किया गया। उन्होंने संदेह जताया कि सरकार और वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण को गंभीरता से पढ़ा भी है या नहीं।
शब्दों की बौछार, लेकिन ठोस नीति गायब
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि यदि आर्थिक सर्वेक्षण पढ़ा भी गया, तो उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार फिर से अपने पुराने शौक पर लौट आई—लोगों पर शब्दों की बौछार करना, खासकर संक्षिप्त शब्दों के जरिए, जबकि जमीन पर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
देश की अर्थव्यवस्था के सामने खड़ी गंभीर चुनौतियां
पी. चिदंबरम ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण और कई विशेषज्ञों ने कम से कम 10 बड़ी चुनौतियों की पहचान की है। इनमें अमेरिका द्वारा लगाए गए दंडात्मक शुल्क, लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक संघर्ष, चीन के साथ बढ़ता व्यापार घाटा, सकल स्थिर पूंजी निर्माण का कम स्तर और निजी निवेश की कमजोरी शामिल हैं। इसके साथ ही प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को लेकर अनिश्चितता, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश का लगातार बाहर जाना, राजकोषीय घाटे में अपेक्षित कमी न होना, वास्तविक महंगाई और आधिकारिक आंकड़ों के बीच अंतर, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों का बंद होना, युवाओं में बेरोजगारी और तेजी से बढ़ता शहरीकरण तथा बिगड़ता बुनियादी ढांचा भी प्रमुख समस्याएं हैं।
बजट भाषण में इन मुद्दों पर चुप्पी
चिदंबरम ने कहा कि इन गंभीर मुद्दों में से किसी को भी वित्त मंत्री के भाषण में संबोधित नहीं किया गया। यही कारण था कि संसद में तालियां औपचारिक रहीं और अधिकांश श्रोता जल्द ही ध्यान हटाकर अन्य गतिविधियों में लग गए।
वित्त प्रबंधन को बताया बेहद कमजोर
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि एक लेखाकार के मानकों से भी देखें तो 2025–26 का वित्त प्रबंधन बेहद खराब रहा। उन्होंने बताया कि राजस्व प्राप्तियां 78,086 करोड़ रुपए कम रहीं, जबकि कुल व्यय 1,00,503 करोड़ रुपए कम रहा। राजस्व व्यय में 75,168 करोड़ रुपए की कमी आई और पूंजीगत व्यय में कुल 1,44,376 करोड़ रुपए की कटौती की गई, जिसमें केंद्र का हिस्सा 25,335 करोड़ रुपए और राज्यों का हिस्सा 1,19,041 करोड़ रुपए रहा।
आम लोगों से जुड़े मदों में सबसे ज्यादा कटौती
पी. चिदंबरम ने कहा कि राजस्व व्यय में की गई कटौतियों का सबसे ज्यादा असर आम जनता से जुड़े क्षेत्रों पर पड़ा। ग्रामीण विकास, शहरी विकास, सामाजिक कल्याण, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अहम क्षेत्रों में भारी कमी की गई, जिससे आम लोगों की समस्याएं और बढ़ सकती हैं।
महत्वपूर्ण योजनाओं में धन घटाया गया
कांग्रेस नेता ने कहा कि कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों और कार्यक्रमों में बजट घटाया गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बहुप्रचारित जल जीवन मिशन पर किया गया खर्च 67,000 करोड़ रुपए से घटाकर केवल 17,000 करोड़ रुपए कर दिया गया, जो सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है।
राजकोषीय अनुशासन पर भी सवाल
पी. चिदंबरम ने कहा कि राजकोषीय घाटे का संशोधित अनुमान 4.4 प्रतिशत पर ही बना रहा है और 2026–27 में इसमें केवल 0.1 प्रतिशत की कमी का अनुमान है। राजस्व घाटा भी 1.5 प्रतिशत पर स्थिर रहेगा। उन्होंने कहा कि इसे वित्तीय अनुशासन की दिशा में कोई साहसिक कदम नहीं कहा जा सकता।
योजनाओं की भरमार, लेकिन भविष्य अनिश्चित
पूर्व मंत्री ने बजट भाषण की सबसे गंभीर कमी यह बताई कि इसमें योजनाओं, कार्यक्रमों, मिशनों और संस्थानों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कम से कम 24 नई घोषणाओं की गिनती की है और सवाल उठाया कि इनमें से कितनी योजनाएं अगले साल तक जीवित रहेंगी।
कर नीति पर भी उठाए सवाल
पी. चिदंबरम ने कहा कि आयकर अधिनियम 2026 के लागू होने से पहले कुछ दरों में बदलाव किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन छोटे-छोटे परिवर्तनों के असर का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया जाना चाहिए, क्योंकि देश की बड़ी आबादी का आयकर से सीधा संबंध ही नहीं है। अप्रत्यक्ष करों के मामले में भी आम व्यक्ति को केवल कुछ सीमित प्रावधानों से ही फर्क पड़ेगा।
छोटी रियायतों का स्वागत, लेकिन निष्कर्ष सख्त
कांग्रेस नेता ने कहा कि वह इन छोटी कर रियायतों का स्वागत करते हैं, लेकिन कुल मिलाकर बजट और बजट भाषण आर्थिक रणनीति और आर्थिक नेतृत्व की कसौटी पर खरे नहीं उतरते।
जयराम रमेश का आरोप: घरेलू बजट घटा, कर्ज बढ़ा
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि घरेलू बजट में कटौती की गई है, जबकि घरेलू ऋण लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस गंभीर मुद्दे पर बजट में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।





