नई दिल्ली: लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल 2025 (Waqf Amendment Bill 2025) पर चर्चा और पारित होने के दौरान कांग्रेस नेता एवं वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने इस मुद्दे पर खुलकर असंतोष जताते हुए विपक्षी एकजुटता पर सवाल उठाए हैं।
सुप्रभातम् ने प्रियंका गांधी की अनुपस्थिति को बताया “काला धब्बा”
IUML से जुड़ी धार्मिक संस्था समस्त केरल जेम-इयथुल उलमा के आधिकारिक मुखपत्र सुप्रभातम् ने 4 अप्रैल को प्रकाशित एक लेख में प्रियंका गांधी की संसद में गैरमौजूदगी को “कांग्रेस के लिए काला धब्बा” करार दिया। लेख में यह तीखा सवाल उठाया गया – “जब भाजपा इस बिल को आगे बढ़ा रही थी, तब प्रियंका गांधी कहां थीं?”
इस टिप्पणी को IUML की नाराजगी का सार्वजनिक संकेत माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी खुद भी कांग्रेस के नेतृत्व वाले भारत गठबंधन (INDIA bloc) का हिस्सा है।
राहुल गांधी की चुप्पी पर भी सवाल, विपक्षी भूमिका पर चर्चा
सुप्रभातम् में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए गए। लेख में कहा गया कि विपक्ष का यह नैतिक दायित्व था कि वह इस तरह के संवेदनशील मुद्दे पर मुखर होकर बोले। हालांकि लेख में यह भी स्वीकार किया गया कि वक्फ संशोधन बिल के विरोध में कांग्रेस, टीएमसी और वाम दलों ने सदन में संयुक्त रूप से विरोध दर्ज कराया, जो विपक्षी एकता की सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करता है।

राज्यसभा में कांग्रेस का विरोध, सैयद नसीर हुसैन ने बताया असंवैधानिक
राज्यसभा में कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने इस विधेयक को “असंवैधानिक और अन्यायपूर्ण” करार दिया। उन्होंने कहा:
“यह एक संवैधानिक संकट है। यह विधेयक न केवल अल्पसंख्यक समुदाय की संपत्ति और अधिकारों को प्रभावित करता है, बल्कि यह साफ़ तौर पर एक लक्षित कानून है। संसद में हुई बहस गंभीर थी, लेकिन सरकार अपने रुख पर अड़ी रही।”
सरकार की दृढ़ता के चलते अंततः यह बिल शुक्रवार की मध्यरात्रि के बाद संसद से पारित हो गया।

वक्फ संशोधन बिल 2025: क्या है प्रावधान?
वक्फ संशोधन बिल 2025 का उद्देश्य वर्ष 1995 के मौजूदा वक्फ अधिनियम में संशोधन कर प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना है। इसके तहत:
- वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की प्रक्रिया को तकनीकी रूप से उन्नत किया जाएगा।
- वक्फ बोर्ड की कार्यक्षमता में सुधार हेतु सूचना तकनीक और डिजिटलीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
- पहले के अधिनियम में मौजूद कानूनी और प्रशासनिक खामियों को दूर करने का दावा किया गया है।
हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि यह विधेयक अल्पसंख्यक समुदाय की संपत्ति और अधिकारों पर सीधा प्रहार है, और यह राजनीतिक रूप से प्रेरित है।