झुंझुनूं: जिले से सामने आई एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई में सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला उजागर हुआ है। ग्राम पंचायत पातुसरी और नयासर में पदस्थ रहते हुए करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता करने के आरोपों में ग्राम विकास अधिकारी सिद्धार्थ खीचड़ की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। जांच में पत्नी और अन्य रिश्तेदारों के खातों में लाखों रुपये के अनाधिकृत हस्तांतरण और नकद गबन की पुष्टि होने के बाद जिला परिषद स्तर पर यह सख्त निर्णय लिया गया।
जांच में क्या आया सामने
जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैलाश चंद्र यादव के अनुसार जांच में यह तथ्य सामने आया कि सिद्धार्थ खीचड़ ने ग्राम विकास अधिकारी के पद पर रहते हुए सरकारी राशि का दुरुपयोग किया। जांच रिपोर्ट में प्रमाणित हुआ कि कार्मिक द्वारा पत्नी और अन्य रिश्तेदारों के खातों में क्रमशः 46,86,889 रुपये और 55,92,600 रुपये की अनाधिकृत राशि ट्रांसफर की गई, जबकि 66,940 रुपये की नकद राशि का भी गबन किया गया।
परिवीक्षाकाल में ही किया गया गंभीर दुराचार
प्रशासनिक स्तर पर इस मामले को इसलिए भी अत्यंत गंभीर माना गया क्योंकि सिद्धार्थ खीचड़ ने यह कृत्य अपने परिवीक्षाकाल के दौरान किया। सरकारी सेवा में रहते हुए प्रारंभिक अवधि में ही इस स्तर की वित्तीय अनियमितता और राजकीय धन का निजी खातों में हस्तांतरण स्पष्ट रूप से गंभीर दुराचार की श्रेणी में पाया गया।
जिला स्थापना समिति की बैठक में हुआ फैसला
29 दिसंबर 2025 को जिला कलक्टर एवं जिला परिषद प्रशासक अरुण गर्ग की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्थापना समिति की बैठक में इस पूरे प्रकरण पर विचार किया गया। समिति ने जांच निष्कर्षों को आधार बनाते हुए यह माना कि सिद्धार्थ खीचड़ का आचरण सेवा नियमों के विपरीत और प्रशासनिक विश्वास के खिलाफ है, जिसके चलते ग्राम विकास अधिकारी पद की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
प्रशासन ने दिया सख्त संदेश
इस कार्रवाई के माध्यम से जिला परिषद प्रशासन ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकारी धन के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई रियायत नहीं दी जाएगी। विशेष रूप से ग्रामीण विकास से जुड़े विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर प्रशासन पूरी तरह सख्त रुख अपनाए हुए है।
ग्रामीण विकास विभाग पर प्रभाव
यह मामला ग्रामीण विकास विभाग में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार भविष्य में भी इस तरह की वित्तीय अनियमितताओं पर कड़ी निगरानी और त्वरित कार्रवाई जारी रहेगी।





