चिड़ावा: गुरुवार को देवरोड़ गांव में स्मार्ट मीटर लगाने के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। ग्रामीणों ने बिजली विभाग और सरकार पर मनमानी का आरोप लगाते हुए मांग की कि स्मार्ट मीटर योजना तुरंत रद्द की जाए। प्रदर्शन में किसान, बुजुर्ग और युवा सब एक साथ आवाज बुलंद करते नजर आए।
गांव में बिजली विभाग की स्मार्ट मीटर योजना के खिलाफ ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने “स्मार्ट मीटर वापस लो” और “बिजली विभाग मुर्दाबाद” के नारे लगाते हुए सरकार को चेताया कि यदि ये मीटर नहीं हटाए गए तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
ग्रामीणों ने कहा कि सरकार एक ओर मुफ्त बिजली और सौर ऊर्जा बढ़ाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर निजी बिजली कंपनियों को आमजन को लूटने की खुली छूट दे रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि स्मार्ट मीटर गरीबों और किसानों पर कुठाराघात साबित हो रहे हैं, क्योंकि इससे बिजली बिलों में लगातार वृद्धि हो रही है।
प्रदर्शन में श्रीचंद नेहरा, राजेंद्र नेहरा (फौजी), शीशराम पिलानिया, कन्हैयालाल कुल्हार, जयसिंह वकील, फूलसिंह जांगिड़, सुरेश सैन, महेंद्र कुमावत, राजेंद्र कुल्हरी, हरीश कुल्हार, बजरंग लाल नेहरा, नंदलाल धत्तरवाल, महेंद्र मुनीम और सुरेश नेहरा सहित अनेक ग्रामीण शामिल हुए।
ग्रामीणों ने कहा कि देवरोड़ पंचायत हमेशा से जनहित के मुद्दों पर संगठित होकर आवाज उठाने के लिए जानी जाती है। उन्होंने सरकार को चेताया कि अगर जल्द स्मार्ट मीटर हटाने की घोषणा नहीं की गई तो गांव स्तर पर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
स्मार्ट मीटर विवाद केवल देवरोड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे झुंझुनूं जिले में उपभोक्ताओं के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। कई उपभोक्ता यह दावा कर रहे हैं कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिल दोगुने हो गए हैं और मीटर रीडिंग में पारदर्शिता नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार को उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति का ध्यान रखते हुए पारदर्शी नीति बनानी चाहिए, अन्यथा यह विरोध प्रदेशभर में फैल सकता है।





