वाशिंगटन: अमेरिका की राजनीति और अर्थव्यवस्था में भूचाल आ गया है। यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगाए गए अधिकांश टैरिफ को गैरकानूनी घोषित कर दिया। यह फैसला न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है बल्कि राजकीय तंत्र की सीमाओं और भ्रष्टाचार पर भी गंभीर सवाल उठाता है।
अपील कोर्ट का बड़ा फैसला: टैरिफ अवैध घोषित
वाशिंगटन डीसी स्थित यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स ने कहा कि राष्ट्रपति के पास आपातकालीन शक्तियां तो हैं, लेकिन इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) उन्हें टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टैक्स और शुल्क लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है।
यह फैसला विशेष रूप से अप्रैल में लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ और फरवरी में चीन, कनाडा और मैक्सिको पर लगाए गए शुल्क से जुड़ा है। हालांकि स्टील और एल्युमिनियम पर लगाए गए अन्य शुल्क पर इसका असर नहीं होगा।
ट्रंप का पलटवार: “अमेरिका को तबाह कर देगा यह फैसला”
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर इस आदेश को खारिज करते हुए कहा कि “सभी टैरिफ लागू रहेंगे।” उन्होंने अदालत पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए लिखा कि अगर ये शुल्क हटाए गए तो यह अमेरिका के लिए “एक बड़ी आपदा” होगी।
ट्रंप ने तर्क दिया कि विदेशी देशों द्वारा लगाए गए अनुचित टैरिफ और व्यापार घाटे से अमेरिकी मजदूर और किसान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट की मदद से वह टैरिफ को राष्ट्रहित में इस्तेमाल करेंगे।
राजकीय भ्रष्टाचार और सत्ता की सीमाएँ
इस पूरे मामले ने एक बार फिर राजकीय कार्यों में भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रंप ने IEEPA का इस्तेमाल ऐसे टैरिफ लगाने के लिए किया जो संविधान के दायरे से बाहर था। सत्ता की सीमाएँ तोड़कर इस तरह की आर्थिक नीतियाँ केवल तत्कालिक राजनीतिक फायदे देती हैं लेकिन लंबे समय में अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाती हैं।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि जब नेता अपनी शक्ति से परे जाकर फैसले लेते हैं, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। राजकीय भ्रष्टाचार और संस्थाओं की कमजोरियां ऐसे ही हालात को जन्म देती हैं।
आठ मुकदमे और बढ़ता दबाव
ट्रंप की टैरिफ नीतियों को लेकर अब तक कम से कम आठ मुकदमे दायर हो चुके हैं, जिनमें कैलिफोर्निया राज्य का केस भी शामिल है। इससे पहले न्यूयॉर्क स्थित यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड और वाशिंगटन की एक अन्य अदालत भी IEEPA के तहत टैरिफ लगाने को असंवैधानिक बता चुकी हैं।