जैसलमेर: पोखरण इलाके में राजस्थान पुलिस की खुफिया शाखा ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने के आरोप में एक स्थानीय युवक को गिरफ्तार कर बड़ा खुलासा किया है। लगातार तकनीकी निगरानी, सोशल मीडिया ट्रैकिंग और खुफिया सूचनाओं के आधार पर की गई इस कार्रवाई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। आरोपी पर भारतीय सेना से जुड़ी संवेदनशील और रणनीतिक जानकारी पाकिस्तान भेजने का गंभीर आरोप है, जिससे सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा को लेकर चिंता और गहराई है।
पोखरण से डिटेन युवक पर ISI के लिए जासूसी का आरोप
राजस्थान पुलिस की खुफिया शाखा ने जैसलमेर जिले के पोखरण क्षेत्र से एक युवक को डिटेन कर पूछताछ के बाद औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (खुफिया) प्रफुल्ल कुमार ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी भारतीय सेना से संबंधित संवेदनशील और रणनीतिक महत्व की जानकारियां सीमा पार स्थित पाकिस्तानी संचालकों को भेज रहा था। यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही खुफिया निगरानी का नतीजा है।
सीमावर्ती इलाकों में बढ़ी पाकिस्तानी जासूसी गतिविधियां
प्रफुल्ल कुमार ने कहा कि खुफिया सूचनाओं से यह संकेत मिले थे कि राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में पाकिस्तानी एजेंसियां जासूसी नेटवर्क को सक्रिय करने की कोशिश कर रही हैं। इसी इनपुट के आधार पर राजस्थान खुफिया विभाग ने तकनीकी और मानव खुफिया का संयुक्त अभियान शुरू किया, जिसमें कई संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी गई।
नेदान गांव के युवक की गतिविधियां पाई गईं संदिग्ध
इस अभियान के दौरान पोखरण के संकरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नेदान गांव निवासी भाना राम के पुत्र 28 वर्षीय झाबराराम की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। तकनीकी विश्लेषण में सामने आया कि वह विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों के संपर्क में था। निगरानी बढ़ाए जाने के बाद उसकी डिजिटल गतिविधियों की गहन जांच की गई।
मोबाइल फोरेंसिक जांच में चौंकाने वाले खुलासे
पूछताछ और झाबराराम के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच के दौरान कई अहम सबूत सामने आए। जांच में पता चला कि आरोपी ने अपने नाम से पंजीकृत सिम कार्ड का ओटीपी पाकिस्तानी हैंडलर्स को साझा किया था। इसी सिम कार्ड का उपयोग व्हाट्सएप अकाउंट सक्रिय करने के लिए किया गया, जिसे राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के संचार का माध्यम बनाया गया।
हनीट्रैप और पैसों के लालच में फंसा आरोपी
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रफुल्ल कुमार के अनुसार, झाबराराम को हनीट्रैप और वित्तीय प्रलोभनों के जरिए ISI के जासूसी नेटवर्क में शामिल किया गया था। आरोप है कि पैसे के बदले उसने भारतीय सेना की गतिविधियों, मूवमेंट और ठिकानों से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा की। यह जानकारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानी जा रही है।
जयपुर लाकर संयुक्त एजेंसियों ने की पूछताछ
प्रारंभिक पुष्टि के बाद आरोपी को जयपुर स्थित केंद्रीय पूछताछ केंद्र लाया गया, जहां राजस्थान पुलिस खुफिया, सैन्य खुफिया और अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त रूप से उससे पूछताछ की। जांच के दौरान जुटाए गए डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों की पुष्टि की गई।
आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत मामला दर्ज
साक्ष्यों की पुष्टि होने के बाद राजस्थान खुफिया एजेंसी ने आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 के तहत मामला दर्ज किया। इसके बाद शुक्रवार को झाबराराम को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हो सकते हैं।





