सीकर: फतेहपुर उपखंड के हिरणा गांव निवासी युवा कलाकार मनीष ढाका ने अपनी अनोखी कला से पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। केवल काले बॉल प्वाइंट पेन से रामायण के चित्र बनाकर उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय और राज्यपाल तक से सराहना पाई है। शेखावाटी की धरती से निकला यह कलाकार आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी पहचान बना चुका है।
शेखावाटी की धरती से उभरा अनोखा कलाकार
कला और संस्कृति की विरासत के लिए प्रसिद्ध शेखावाटी क्षेत्र से एक और प्रतिभा सामने आई है। सीकर जिले के फतेहपुर उपखंड के हिरणा गांव के निवासी मनीष ढाका ने पेंटिंग को केवल शौक नहीं, बल्कि अपना जीवन लक्ष्य बना लिया। हूबहू स्केच और रियलिस्टिक ड्रॉइंग में महारत रखने वाले मनीष आज देश-विदेश में अपनी कला का लोहा मनवा चुके हैं।
PMO, CMO और राज्यपाल तक पहुंची कला
मनीष ढाका की कला की सराहना प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा की जा चुकी है। राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने उनसे व्यक्तिगत मुलाकात कर उनके कार्य में गहरी रुचि दिखाई। कई जनप्रतिनिधि और कला प्रेमी भी उनकी अनूठी शैली को देखने और समझने के लिए उनसे मिल चुके हैं।
बालमुखी रामायण ने दिलाई देशभर में पहचान
अवि शर्मा द्वारा रचित बालमुखी रामायण के लिए मनीष ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों के चित्र तैयार किए। ये सभी चित्र केवल काले बॉल प्वाइंट पेन से बनाए गए थे। इसी अनोखी तकनीक ने उन्हें खास पहचान दिलाई और इसी कार्य के लिए उन्हें पीएमओ और सीएमओ से प्रशंसा पत्र भी मिला।
50 से ज्यादा पुरस्कार और रिकॉर्ड बुक में नाम
पेंटिंग के क्षेत्र में मनीष को अब तक 50 से अधिक पुरस्कार मिल चुके हैं। उनका नाम ओएमजी बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज है और वे राष्ट्रीय गौरव सम्मान से सम्मानित हो चुके हैं। इंडिया आर्ट गैलरी सहित कई प्रतिष्ठित गैलरियों में उनके चित्रों की प्रदर्शनी लग चुकी है, जहां अंतरराष्ट्रीय दर्शकों ने भी उनके काम को सराहा।
संघर्षों के बीच बनाई सफलता की राह
24 वर्षीय मनीष ढाका का जीवन संघर्षों से भरा रहा। 10 वर्ष की उम्र में मां का निधन हो गया, लेकिन उन्होंने हालातों के आगे हार नहीं मानी। नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा पास कर 12वीं तक की पढ़ाई की और बाद में बीकानेर से बीएफए की प्रोफेशनल डिग्री हासिल की।
दुबई में सिखाई पेंटिंग, अंतरराष्ट्रीय अनुभव
हाल ही में मनीष डेढ़ साल तक दुबई की वुडलैम संस्था में पेंटिंग सिखाने का काम कर भारत लौटे हैं। इस दौरान दुबई के मनीपाल विश्वविद्यालय ने भी उन्हें सम्मानित किया। इस अंतरराष्ट्रीय अनुभव ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया है।
गिनीज बुक में नाम दर्ज कराना अगला लक्ष्य
मनीष ढाका का अगला सपना गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराना है। फिलहाल वे स्कूल में मैनेजमेंट का कार्य संभालते हैं और रोजाना 17 से 18 घंटे तक कला को समय देते हैं।
कला के साथ सामाजिक सरोकार
कोरोना काल में सेवा कार्यों के लिए मनीष को सम्मानित किया गया। चूरू पुलिस की “मास्क ही वैक्सीन है” प्रतियोगिता में उनके डिजाइन को पहला स्थान मिला। स्काउट गाइड के साथ मिलकर उन्होंने नगर परिषद सीकर के सामने 25 फीट लंबी और 20 फीट चौड़ी रंगोली बनाई, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई। उनकी शॉर्ट फिल्म “आटा साटा : एक कुप्रथा” और “मौत के बाद : किसान” को भी खूब सराहना मिली।





