वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका के पूर्व सैन्य अधिकारी और वॉरफेयर विशेषज्ञ जॉन स्पेंसर ने भारत-पाकिस्तान के हालिया संघर्ष और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। एक समाचार एजेंसी के साथ बातचीत में स्पेंसर ने कहा कि यह संघर्ष केवल दो देशों के बीच की सैन्य झड़प नहीं, बल्कि भारतीय स्वदेशी रक्षा प्रणालियों और चीनी तकनीकी प्रणालियों के बीच एक अप्रत्यक्ष परीक्षण था, जिसे पूरी दुनिया ने बारीकी से देखा।
स्पेंसर ने स्पष्ट किया कि यह कहना गलत है कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम केवल अमेरिकी मध्यस्थता से संभव हो पाया। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें ट्रंप ने कहा था कि उनके हस्तक्षेप के कारण ही दोनों देशों में शांति संभव हो पाई। स्पेंसर ने कहा कि संघर्षविराम की प्रक्रिया पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों की पहल पर शुरू हुई जब पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय समकक्ष से सीधा संपर्क किया।
पूर्व अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की सेना आज पूरी तरह से चीन की तकनीकी सहायता पर निर्भर है, और चीन अपनी रक्षा तकनीक का परीक्षण करने के लिए पाकिस्तान को एक प्रयोगशाला की तरह उपयोग करता है। इसके विपरीत भारत न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए तैयार है, बल्कि वह स्वदेशी तकनीक और वर्षों की तैयारी के आधार पर रणनीतिक निर्णय लेने की स्थिति में भी है।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य क्षमता, सटीकता और रणनीतिक संयम को दर्शाया है। भारत ने यह हमला केवल जवाब देने के लिए नहीं किया, बल्कि यह एक रणनीतिक संदेश था कि देश में न सिर्फ सैन्य कौशल है, बल्कि वह उसका उपयोग करने की इच्छाशक्ति और नियंत्रण दोनों रखता है।
स्पेंसर ने यह भी कहा कि यह ऑपरेशन मात्र चार दिनों का युद्ध नहीं था, बल्कि एक दशक की लंबी तैयारी का परिणाम था। भारत ने दिखा दिया है कि वह किसी भी संभावित युद्ध की आशंका को गंभीरता से लेता है और उसके लिए लगातार तैयारी कर रहा है। युद्ध केवल शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति और रणनीतिक नेतृत्व की परीक्षा है और भारत ने इन सभी पहलुओं में संतुलन दिखाया है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आधुनिक युद्धों में सफलता केवल हथियारों या सैन्य संख्या से नहीं तय होती, बल्कि उस राष्ट्र की राजनीतिक इच्छाशक्ति, रणनीतिक योजना और सैन्य अनुशासन से तय होती है, और भारत इन मानकों पर खरा उतरा है। संयुक्त राज्य अमेरिका को इस बात की चिंता अवश्य रही कि संघर्ष नियंत्रण से बाहर न चला जाए, लेकिन भारत ने अपनी सीमाओं में रहते हुए जवाब दिया।
जॉन स्पेंसर की इस टिप्पणी ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा नीति विशेषज्ञों के बीच भी एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है, जिसमें भारत की सैन्य रणनीति और चीन की तकनीक के बीच प्रतिस्पर्धा के समीकरणों को गहराई से विश्लेषित किया जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर अब न केवल भारत की सामरिक सफलता का प्रतीक बन गया है, बल्कि यह भविष्य के संघर्षों में देश की तैयारियों की दिशा भी स्पष्ट करता है।