उदयपुरवाटी: विधानसभा क्षेत्र के गिरावड़ी गांव में भैरुजी की बणी को बचाने को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। पावर ग्रिड लाइन के लिए सैकड़ों साल पुराने पेड़ों को काटे जाने की आशंका के विरोध में ग्रामीण पिछले सात दिनों से उपखंड कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। सोमवार को आंदोलन ने उग्र रूप लेते हुए ग्रामीणों ने झुंझुनू जिला कलेक्टर का पुतला फूंका और करीब पांच घंटे तक प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यह मामला अब पर्यावरण संरक्षण, वन बचाओ आंदोलन और स्थानीय आस्था से जुड़कर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।
गिरावड़ी गांव के ग्रामीणों का कहना है कि वे पावर ग्रिड लाइन के विरोध में नहीं हैं, बल्कि इसकी दिशा बदलकर दूसरे मार्ग से शिफ्ट करने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि प्रस्तावित मार्ग बदला गया तो भैरुजी की बणी में खड़े हजारों पेड़-पौधों को कटने से बचाया जा सकता है। सोमवार को इसी मांग को लेकर उपखंड कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए उग्र आंदोलन किया।
धरने पर बैठे लोगों ने सरकार की पर्यावरणीय नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियानों से हरियाली बढ़ाने की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर गिरावड़ी गांव में भैरुजी की बणी में सौ साल से अधिक पुराने पेड़ों को काटने की तैयारी की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने इसे दोहरा मापदंड बताते हुए किसी भी स्थिति में पेड़ों की कटाई नहीं होने देने का ऐलान किया।
प्रदर्शन के दौरान संपूर्ण गिरावड़ी गांव के ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। उपखंड कार्यालय परिसर ‘भैरुजी की बणी बचाओ’, ‘पर्यावरण बचाओ’ और ‘पेड़ नहीं कटने देंगे’ जैसे नारों से गूंज उठा। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक पावर ग्रिड लाइन का मार्ग परिवर्तित नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
उपखंड कार्यालय के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन में नगर पालिका अध्यक्ष रामनिवास सैनी, एडवोकेट जितेंद्र सिंह शेखावत, पर्यावरण प्रेमी संयोजक के.के. सैनी, पार्षद अजय तसीड़, पूर्व पंचायत समिति सदस्य हंस वर्मा, एडवोकेट मोतीलाल सैनी, शिव खटाना, प्रवीण शर्मा और रोहिताश गुर्जर मौजूद रहे। इसके साथ ही पर्यावरण बचाओ संघर्ष समिति अध्यक्ष मोहनलाल सैनी, कोट सरपंच प्रतिनिधि आशकरण गुर्जर, बागोरा सरपंच प्रतिनिधि रमेश सैनी और रामलाल सैनी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने आंदोलन को समर्थन दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार ज्ञापन देने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद प्रशासन उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही पावर ग्रिड लाइन के मार्ग में बदलाव को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।





