सूरजगढ़: कस्बे के प्रथम शहीद राजकुमार कुमावत की 24वीं पुण्यतिथि पर सोमवार को शहीद स्मारक पर भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। माल्यार्पण और पुष्पांजलि के साथ शहीद को नमन किया गया, वहीं नगरपालिका द्वारा हाल ही में किए गए चौक और सड़क नामकरण में शहीद के नाम की अनदेखी को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी देखने को मिली। कार्यक्रम में शहीदों के सम्मान, स्मारक सुविधाओं और प्रशासनिक संवेदनशीलता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए।
शहीद स्मारक पर श्रद्धा और सम्मान का भावपूर्ण दृश्य
सोमवार को सूरजगढ़ स्थित शहीद स्मारक पर शहीद राजकुमार कुमावत की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर पूर्व चेयरमैन सुरेश शर्मा, पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष संतोष खंडेलवाल, पूर्व मंडल अध्यक्ष संजय गोयल, पार्षद अजय नायक और नरेन्द्र सिंह ने प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर शहीद के बलिदान को नमन किया। माहौल देशभक्ति के नारों और भावुक क्षणों से सराबोर रहा।
परिजन और कस्बेवासी बोले—शहीद राजकुमार अमर रहें
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शहीद के भाई कजोड़मल वर्मा सहित जगदीश प्रसाद, मुकेश हलवाई, रामजीलाल कुमावत, रामसिंह सैनी और महेन्द्र सैनी ने पुष्प अर्पित किए। इस दौरान ‘शहीद राजकुमार अमर रहें’ के नारों से स्मारक परिसर गूंज उठा। कार्यक्रम में दुलीचंद कुमावत, अभय राम, गजानंद कटारिया, छाजुराम सैनी, अमर सिंह, अनिल नेहरा, अजीत सिंह बिजौली, किशोरी लाल, रूपेन्द्र सिंह, जितेन्द्र, रमेश वर्मा, एडवोकेट नरेश वर्मा, राकेश कुमार, राजु सैनी, मोंटी शर्मा, दलीप सैनी और मुकेश कुमार सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष मौजूद रहे।
चौक नामकरण में शहीद की अनदेखी पर फूटा आक्रोश
कार्यक्रम के दौरान कस्बेवासियों ने हाल ही में नगरपालिका द्वारा किए गए सात चौक और सड़कों के नामकरण पर सवाल खड़े किए। लोगों का कहना था कि सूरजगढ़ के प्रथम शहीद राजकुमार कुमावत के नाम से किसी चौक या सड़क का नामकरण न किया जाना शहीदों के सम्मान के विपरीत है। उपस्थित लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मंचों पर शहीदों का सम्मान किया जाता है, लेकिन जब वास्तविक निर्णय लेने का समय आता है, तो उन्हें भुला दिया जाता है।
शहीद स्मारक के सामने अंधेरा, मूलभूत सुविधाओं की कमी
शहीद के परिजनों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बताया कि शहीद स्मारक के सामने आज तक दो स्ट्रीट लाइट तक नहीं लगाई गई हैं। रात के समय स्मारक क्षेत्र में अंधेरा बना रहता है, जिससे सुरक्षा और सम्मान दोनों प्रभावित होते हैं। परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने शीघ्र कार्रवाई की मांग की।





