Saturday, March 7, 2026
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अमेरिका के स्मिथसोनियन म्यूजियम का ऐतिहासिक फैसला: भारत लौटेंगी तमिलनाडु मंदिरों से चोरी 3 प्राचीन कांस्य मूर्तियां

मीडिया रिपोर्ट्स: अमेरिका के वाशिंगटन डीसी स्थित प्रसिद्ध स्मिथसोनियन नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट ने भारत की सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन मूर्तियों की वापसी, और मंदिरों से चोरी गई कलाकृतियों को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। म्यूजियम ने तमिलनाडु के मंदिरों से अवैध रूप से हटाई गई 3 प्राचीन कांस्य मूर्तियों को भारत सरकार को लौटाने की घोषणा की है, जिससे भारत-अमेरिका सांस्कृतिक सहयोग को नई मजबूती मिली है।

मुख्य खबर: वर्षों की जांच के बाद हुआ ऐतिहासिक निर्णय,अवैध रूप से ले जाई गई मूर्तियों की वापसी पर मुहर

म्यूजियम की ओर से जारी आधिकारिक बयान में स्वीकार किया गया है कि उसके संग्रह में मौजूद ये तीनों मूर्तियां दशकों पहले दक्षिण भारत के मंदिरों से चोरी कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेची गई थीं। इनकी पहचान और मूल स्थान की पुष्टि फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ पांडिचेरी के फोटो अभिलेखागार और ऐतिहासिक रिकॉर्ड के आधार पर की गई।

चोल और विजयनगर काल की अमूल्य धरोहर,शिव नटराज, सोमस्कंद और संत सुंदरर की ऐतिहासिक मूर्तियां

वापस की जाने वाली तीनों मूर्तियां दक्षिण भारतीय कांस्य शिल्प कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
शिव नटराज की चोल कालीन कांस्य मूर्ति लगभग 990 ई. की है, जिसे तंजानूर के तिरुथुराईपुंडी स्थित श्री भव औषधीश्वर मंदिर से चोरी किया गया था।
इसी तरह सोमस्कंद की 12वीं शताब्दी की चोल कालीन मूर्ति मन्नारगुड़ी के अलत्तूर स्थित विश्वनाथ मंदिर से चोरी हुई थी।
तीसरी मूर्ति संत सुंदरर और परवई की है, जो 16वीं शताब्दी के विजयनगर काल की है और कल्लाकुरिची के वीरसोलापुरम स्थित शिव मंदिर से संबंधित है।

फर्जी दस्तावेजों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हुई थी बिक्री,न्यूयॉर्क गैलरी और गिफ्ट के जरिए पहुंचीं मूर्तियां

जांच में सामने आया कि शिव नटराज की मूर्ति 2002 में न्यूयॉर्क की एक गैलरी से खरीदी गई थी, जिसने बिक्री के लिए फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए थे।
वहीं अन्य दो मूर्तियां 1987 में उपहार के रूप में म्यूजियम को सौंपी गई थीं। बाद में जब इनके स्रोत की गहन जांच की गई, तो चोरी और अवैध तस्करी के स्पष्ट प्रमाण मिले।

1956–1959 की तस्वीरें बनीं कानूनी सबूत,फोटो अभिलेखागार से साबित हुई मंदिरों से चोरी

शोधकर्ताओं को इन मूर्तियों की तस्वीरें 1956 से 1959 के बीच तमिलनाडु के मंदिरों में खींची गई मिलीं, जिससे यह कानूनी रूप से प्रमाणित हुआ कि इन्हें मंदिर परिसरों से अवैध रूप से हटाया गया था। यह साक्ष्य भारत सरकार के लिए मूर्तियों की वापसी का मजबूत आधार बना।

भारत सरकार और म्यूजियम के बीच विशेष समझौता,लॉन्ग टर्म लोन पर वापस म्यूजियम जाएगी शिव नटराज मूर्ति

भारत सरकार और स्मिथसोनियन म्यूजियम के बीच हुए विशेष समझौते के तहत शिव नटराज की मूर्ति पहले भारत को सौंपी जाएगी और उसके बाद लॉन्ग टर्म लोन के रूप में पुनः म्यूजियम को प्रदर्शनी के लिए दी जाएगी।
अब यह मूर्ति प्रदर्शनी “द आर्ट ऑफ नोइंग” में दिखाई जाएगी, जहां इसके साथ चोरी से लेकर भारत वापसी तक की पूरी सच्ची कहानी भी दर्शाई जाएगी।

म्यूजियम निदेशक का बयान: सांस्कृतिक जिम्मेदारी का प्रतीक,चेस रॉबिन्सन ने जताया भारत सरकार और ASI का आभार

म्यूजियम के निदेशक चेस रॉबिन्सन ने कहा कि यह निर्णय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पारदर्शिता और नैतिक जिम्मेदारी को दर्शाता है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया में सहयोग के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और भारत सरकार का आभार व्यक्त किया।

निष्कर्ष: भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक सम्मान

यह निर्णय न केवल भारत की ऐतिहासिक धरोहर की वापसी का महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह अवैध कला तस्करी के खिलाफ वैश्विक संदेश, सांस्कृतिक न्याय, और भारत-अमेरिका सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक उदाहरण भी है।

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