नई दिल्ली: India UAE Nuclear Deal ने 2026 में वैश्विक कूटनीति की दिशा बदल दी है। प्रधानमंत्री मोदी और मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की सिर्फ 3 घंटे की मुलाकात से मिडिल ईस्ट का पावर बैलेंस बदल गया, पाकिस्तान की रणनीति कमजोर पड़ी और भारत खाड़ी सुरक्षा का नया स्तंभ बनकर उभरा।
India UAE Nuclear Deal से क्यों हिला मिडिल ईस्ट का संतुलन
दुनिया की कूटनीति में बड़े फैसले आमतौर पर महीनों की बातचीत के बाद होते हैं, लेकिन 2026 में India UAE Nuclear Deal ने केवल 3 घंटे में इतिहास रच दिया। दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की बैठक के दौरान हुए इस समझौते ने खाड़ी देशों की सुरक्षा नीति को नई दिशा दे दी। विशेषज्ञ इसे सिर्फ परमाणु ऊर्जा सहयोग नहीं, बल्कि भारत के लिए रणनीतिक छलांग मान रहे हैं।
बाराक न्यूक्लियर पावर प्लांट पर भारत की ऐतिहासिक भूमिका
इस डील के तहत UAE के बाराक न्यूक्लियर पावर प्लांट के संचालन और निगरानी में न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की सीधी भूमिका तय हुई है। यह अरब दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र है, जिसे अब तक दक्षिण कोरिया और अमेरिका संचालित कर रहे थे। अब भारत के विशेषज्ञ सुरक्षा प्रणाली, वैज्ञानिक प्रबंधन और ऑपरेशनल नियंत्रण में सक्रिय योगदान देंगे, जिससे खाड़ी क्षेत्र की ऊर्जा और सुरक्षा नीति में भारत का प्रभाव बढ़ेगा।
‘वर्चुअल न्यूक्लियर अंब्रेला’ से बदली सुरक्षा की परिभाषा
रणनीतिक जानकारों के अनुसार यह समझौता एक नई सुरक्षा गारंटी है, जिसे ‘वर्चुअल न्यूक्लियर अंब्रेला’ कहा जा रहा है। यदि कोई तीसरा देश इस संयंत्र को निशाना बनाता है, तो इसे भारत के हितों पर हमला माना जाएगा। इससे UAE को परोक्ष रूप से भारत की परमाणु सुरक्षा छतरी मिल गई है और मिडिल ईस्ट में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और मजबूत हुई है।
Pakistan को बड़ा झटका, पुरानी रणनीति हुई फेल
इस डील से Pakistan की वह कोशिश पूरी तरह नाकाम हो गई, जिसके तहत वह सऊदी अरब के साथ म्यूचुअल डिफेंस डील कर अरब दुनिया में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता था। India UAE Nuclear Deal के बाद साफ हो गया कि UAE अब सुरक्षा और ऊर्जा के लिए Pakistan पर नहीं, बल्कि भारत पर भरोसा करेगा। यह फैसला दक्षिण एशिया की राजनीति में भी नए समीकरण बना रहा है
तेल के बाद की दुनिया में भारत बना UAE का रणनीतिक साझेदार
UAE अब क्लीन एनर्जी, डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है। ऐसे में भारत को रणनीतिक साझेदार बनाना उसके लिए एक सुरक्षित और विश्वसनीय विकल्प साबित हुआ। यह समझौता सिर्फ बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीकी हस्तांतरण और ज्ञान साझेदारी का भी नया अध्याय खोलता है।
अमेरिका और चीन की चिंता, भारत बना नया विकल्प
इस डील के बाद अमेरिका और चीन दोनों की नजरें मिडिल ईस्ट पर टिक गई हैं। अमेरिका लंबे समय से खाड़ी देशों को अपनी सुरक्षा छतरी में रखना चाहता था, जबकि चीन तकनीक के जरिए क्षेत्र में प्रभाव बढ़ा रहा था। लेकिन India UAE Nuclear Deal के जरिए भारत ने खुद को भरोसेमंद और संतुलित रणनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया है।
मिसाइल और एयर डिफेंस से बनेगा नया सुरक्षा कवच
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस समझौते के तहत मिसाइल डिफेंस और एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती भी संभव है। इससे भारत और UAE के बीच भाईचारे जैसा मजबूत रिश्ता बनेगा, जहां व्यापारिक और सैन्य साझेदारी अब भविष्य की सुरक्षा का आधार बनेगी।





