झुंझुनूं: जिले के टांई गांव में जोहड़ की खाई में बड़ी संख्या में मिले सेनेटरी पैड को लेकर सोशल मीडिया और मेन स्ट्रीम मीडिया द्वारा स्थानीय स्तर पर उठे सवालों पर अब स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। सीएमएचओ छोटेलाल गुर्जर के निर्देश पर गठित जांच समिति की रिपोर्ट में सामने आया है कि जोहड़ में फेंके गए सेनेटरी पैड सरकारी सप्लाई का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि ये किसी निजी मेडिकल स्टोर की एक्सपायरी सामग्री हैं, जिन्हें नियमों की अनदेखी कर निस्तारित किया गया।
जांच के बाद सीएमएचओ ने किया बड़ा खुलासा
सीएमएचओ छोटेलाल गुर्जर ने बताया कि टांई गांव के जोहड़ क्षेत्र में सेनेटरी पैड मिलने की सूचना मिलते ही विभाग ने इसे गंभीरता से लिया। तत्काल जिला औषधि भंडार प्रभारी जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई, जिसमें विकास महला और अशोक कुमार को शामिल किया गया। समिति ने स्थानीय सरपंच और ग्रामीणों की मौजूदगी में मौके का निरीक्षण किया।
एमआरपी से हुआ सरकारी सप्लाई न होने का खुलासा
जांच के दौरान मौके पर मिले सेनेटरी पैड के पैकेटों पर एमआरपी अंकित पाई गई, जो कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत वितरित सामग्री पर नहीं होती। इसी आधार पर समिति ने प्राथमिक रूप से निष्कर्ष निकाला कि यह सामग्री चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की सप्लाई से संबंधित नहीं है, बल्कि निजी क्षेत्र से जुड़ी हुई है।
सैंपल लेकर औषधि नियंत्रण विभाग को भेजा गया मामला
जांच समिति द्वारा मौके से सेनेटरी पैड के सैंपल एकत्र कर औषधि नियंत्रण कार्यालय को भेजे गए हैं। एडीसी को पत्र लिखकर उत्पादनकर्ता की पुष्टि, सप्लाई चैन की जांच और संबंधित मेडिकल स्टोर के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। सीएमएचओ छोटेलाल गुर्जर ने स्पष्ट किया कि नियम विरुद्ध तरीके से मेडिकल वेस्ट या एक्सपायरी सामग्री का निस्तारण किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग की सख्ती, दोषियों पर होगी कार्रवाई
सीएमएचओ ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के बाद यदि किसी निजी मेडिकल स्टोर या सप्लायर की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ औषधि नियंत्रण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए जिलेभर में मेडिकल स्टोर्स की निगरानी भी बढ़ाई जाएगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
यह मामला केवल पर्यावरण प्रदूषण से जुड़ा नहीं है, बल्कि महिला स्वास्थ्य, मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे गंभीर विषयों को भी उजागर करता है। गलत तरीके से फेंकी गई एक्सपायरी मेडिकल सामग्री सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।





