चिड़ावा: मंड्रेला रोड पर अंबिका नगर के श्रीराम बस्ती में संचालित श्रीराम शाखा में आज सुबह एक प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला जब 83 वर्षीय स्वयंसेवक हरि प्रसाद शर्मा ने शाखा में उपस्थित स्वयंसेवकों को योगाभ्यास करवाया। सुबह 6 बजे, वे 2 किलोमीटर साइकिल चलाकर शाखा स्थल पहुंचे और स्वयंसेवकों के साथ गीत, प्रार्थना और योग के माध्यम से दिन की शुरुआत की।
💪 “सुबह का एक घंटा अपने शरीर के लिए निकालना जरूरी”
योग सत्र के दौरान हरि प्रसाद शर्मा ने कहा कि आज के भागदौड़ भरे जीवन में शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए योग सबसे आवश्यक साधन है। उन्होंने बताया कि हर व्यक्ति को दिन में कम से कम एक घंटा व्यायाम और योग के लिए निकालना चाहिए। उन्होंने कहा, “आप अपने शरीर से 24 घंटे कार्य करवाते हैं, तो उसे स्वस्थ रखने के लिए एक घंटा व्यायाम का समय अवश्य दें। शरीर स्वस्थ रहेगा तो हर कार्य सहज हो जाएगा।”
🧘 विभिन्न बीमारियों में कौन से योगासन उपयोगी
शर्मा ने बताया कि योग से न केवल तनाव, थकान, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियों से राहत मिलती है, बल्कि यह मानसिक संतुलन और एकाग्रता को भी बढ़ाता है। उन्होंने उपस्थित लोगों को बताया कि प्राणायाम, सूर्य नमस्कार, भुजंगासन और ताड़ासन जैसे आसन शरीर को लचीला बनाते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं।
🌍 सात साल की उम्र से संघ कार्य में सक्रिय
हरि प्रसाद शर्मा ने बताया कि उन्होंने सात वर्ष की उम्र में पहली बार शाखा में जाना शुरू किया था। तब से लेकर अब तक वे देश के विभिन्न राज्यों में संघ कार्य करते हुए समाज सेवा में जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि शाखा ने उन्हें अनुशासन, सेवा और सकारात्मक दृष्टिकोण सिखाया, जो जीवन के हर क्षेत्र में सफलता का आधार है।
🫶 शताब्दी वर्ष पर दिया विशेष आह्वान
संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर हरि प्रसाद शर्मा ने सभी परिवारों से अपील की कि वे अपने बच्चों को शाखा से जोड़ें और खुद भी जुड़कर स्वस्थ, निरोग और अनुशासित जीवन का उदाहरण बनें। उन्होंने कहा, “संघ केवल संगठन नहीं, बल्कि जीवन को जीने की एक प्रेरणा है। शाखा का एक घंटा आपके जीवन में आत्मबल, अनुशासन और शांति लाता है।”
🎯 प्रेरक संदेश से प्रभावित हुए स्वयंसेवक
शाखा में उपस्थित स्वयंसेवकों ने हरि प्रसाद शर्मा की ऊर्जा और अनुशासन देखकर उत्साह व्यक्त किया। उनकी जीवन यात्रा और समर्पण भाव ने सभी को प्रेरित किया कि उम्र कोई बाधा नहीं, अगर मन में संकल्प हो तो जीवन में हर दिन नया उत्साह भरा जा सकता है।
