झुंझुनूं में दलित-पिछड़ा-अल्पसंख्यक महासंघ का हल्ला बोल, EVM हटाने और संविधान बचाने की मांग को लेकर निकाला मार्च

झुंझुनूं: जिले में बुधवार को ‘संविधान बचाओ’ के नारों के साथ दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए। दलित पिछड़ा अल्पसंख्यक महासंघ के बैनर तले डॉ. बी.आर. अंबेडकर पार्क से कलेक्ट्रेट तक एक विशाल पैदल मार्च निकाला गया। इस दौरान EVM हटाने, कोलेजियम सिस्टम खत्म करने और संवैधानिक संस्थाओं की सुरक्षा जैसी कई बड़ी मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया।

संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का लगाया आरोप

महासंघ ने आरोप लगाया कि पिछले 75 वर्षों में संविधान को पूरी तरह लागू करने के बजाय, संवैधानिक संस्थाओं को लगातार कमजोर किया जा रहा है। ज्ञापन में सर्वोच्च न्यायालय, चुनाव आयोग, संघ लोक सेवा आयोग, अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़ा वर्ग आयोग जैसी संस्थाओं को कमजोर और अधिकार विहीन बनाने का आरोप लगाया गया। महासंघ के संयोजक बलवीर सिंह काला ने कहा कि संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का हनन हो रहा है और राजकीय कार्यों में एक धर्म विशेष को बढ़ावा दिया जा रहा है।

अत्याचार और न्यायपालिका पर हमले को लेकर आक्रोश

प्रदर्शन के दौरान देश में हो रही विभिन्न घटनाओं पर भी गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में वकील राकेश किशोर द्वारा “जूता फेंकने” की घटना को देशद्रोही कृत्य बताते हुए उस पर NSA और UAPA के तहत कार्रवाई की मांग की गई। साथ ही, हरियाणा में ADGP वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या को जातीय उत्पीड़न से प्रेरित बताते हुए दोषी पुलिस अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें बर्खास्त करने की मांग की गई। ज्ञापन में देश के विभिन्न हिस्सों में दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार, गैंग रेप, मॉब लिंचिंग और बुलडोजर कार्रवाई पर भी रोक लगाने की मांग की गई। इस दौरान रामानंद आर्य, मांगीलाल मंगल, कैप्टन मोहन लाल, और बजरंग लाल सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

EVM से उठा भरोसा, बैलेट पेपर से हों चुनाव

महासंघ ने देश की लोकतांत्रिक प्रणाली को बचाने के लिए EVM को तत्काल बंद करने की पुरजोर मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि देश के नागरिकों का EVM से भरोसा उठ गया है, इसलिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए मत-पत्रों (बैलेट पेपर) से चुनाव कराए जाने चाहिए।

आरक्षण, जाति जनगणना और आयोगों की सिफारिशों पर जोर

मार्च में शामिल युनिस भाटी, मुराद अली, एडवोकेट सुनील सेवदा, और वीरेंद्र मीणा ने आरक्षण को कानून बनाकर इसे पूरी तरह लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि बैकलॉग को विशेष भर्ती अभियान चलाकर भरा जाए, SC/ST को प्रमोशन में आरक्षण दिया जाए और अन्य पिछड़े वर्गों की जाति जनगणना कराई जाए। इसके साथ ही, मंडल आयोग और सच्चर आयोग की सभी सिफारिशों को पूरी तरह से लागू करने की भी मांग की गई।

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