सूरजगढ़: नरहड़ गांव के एक युवक ने शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे ट्रेन के सामने छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। लेकिन हादसे के बाद पुलिस और चिकित्सा विभाग की लापरवाही के चलते शव को पूरे दिन सूरजगढ मोर्चरी में पड़ा रहना पड़ा। सीमा विवाद और जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति ने न सिर्फ परिजनों को असहनीय पीड़ा दी, बल्कि मॉर्चुरी के बाहर खड़े सैकड़ों ग्रामीणों के सब्र का भी इम्तहान लिया।
जानकारी के अनुसार, युवक ने सूरजगढ़ और चिड़ावा थाना क्षेत्र की सीमा पर ट्रेन के आगे छलांग लगाई थी। शव को सूरजगढ़ की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की मॉर्चुरी में रखवा दिया गया, लेकिन पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। चिकित्साकर्मियों और पुलिस कर्मियों के बीच यह उहापोह चलती रही कि हादसा किस थाने की सीमा में हुआ है और पोस्टमार्टम की औपचारिकता कौन पूरी करेगा।
हद तब हो गई जब सूरजगढ़ अस्पताल का एक कर्मचारी शव को मॉर्चुरी में रखकर ताला लगाकर चला गया। तेज बारिश के बीच परिजन और ग्रामवासी शाम 5 बजे तक अस्पताल के बाहर शव के साथ खड़े रहे लेकिन कोई जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। सूरजगढ़ चिकित्सा कर्मियों का बयान सामने आया कि “हम पटरियां नाप कर आए हैं, हादसा सूरजगढ़ की सीमा से करीब दस गज चिड़ावा की सीमा में हुआ है।” इस प्रकार का गैरजिम्मेदार बयान सुनकर ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया।
ग्रामीणों का कहना है कि हादसे के करीब छह घंटे बाद तक न पुलिस यह तय कर पाई कि किस थाने की कार्रवाई होगी, न ही चिकित्साकर्मी पोस्टमार्टम प्रक्रिया शुरू कर पाए। परिजनों ने आरोप लगाया कि संवेदनहीनता की यह स्थिति इस बात को दर्शाती है कि अब सरकारी तंत्र में मानवीय भावनाओं के लिए कोई जगह नहीं बची है।
लोगों ने प्रशासन और चिकित्सा विभाग से मांग की कि ऐसी घटनाओं में जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी परिवार को इस तरह की पीड़ा न झेलनी पड़े।
यह घटना न सिर्फ एक आत्महत्या की पीड़ा है, बल्कि सरकारी मशीनरी की उदासीनता का भी आईना है, जो आम लोगों की भावनाओं से लगातार कटती जा रही है।