हवन की पूर्णाहुति के साथ महालक्ष्मी मंदिर के स्थापना महोत्सव का समापन, भक्ति और श्रद्धा से सराबोर रहा तीन दिवसीय वार्षिक उत्सव

चिड़ावा: नगर के कॉलेज रोड स्थित सनातन आश्रम पोद्दार पार्क में विराजित श्री पीठ महालक्ष्मी धाम के तीन दिवसीय स्थापना वार्षिकोत्सव का समापन रविवार को विधिवत हवन की पूर्णाहुति के साथ हुआ। इस अवसर पर पूरे परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति भाव का वातावरण बना रहा।

समापन दिवस पर हवन का आयोजन धाम के अधिष्ठाता प्रभुशरण तिवाड़ी के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। आचार्य नरेश शास्त्री के आचार्यत्व में पंडित बालकृष्ण चौरासिया समेत अन्य विद्वान ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दिलाई। हवन यज्ञ में मुख्य यजमान पवन कुमार ढाणी वाला ने अपनी पत्नी के साथ आहुतियां अर्पित कीं। इस दौरान प्रभुशरण तिवाड़ी द्वारा श्रीसुक्त का पाठ किया गया और माता महालक्ष्मी की आराधना की गई।

प्रभुशरण तिवाड़ी ने अपने उद्बोधन में कहा कि सच्चे मन से की गई आराधना से जीवन में शांति, समृद्धि और दिव्यता का संचार होता है। उन्होंने बताया कि जब कोई व्यक्ति निष्काम भाव से श्री और हरि की सेवा करता है तो जीवन में सुख-समृद्धि स्वतः चली आती है। यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात यज्ञ भगवान की आरती और फिर मां महालक्ष्मी की महाआरती की गई, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने आस्था और उत्साह के साथ भाग लिया।

महाआरती के बाद भगवान को प्रसाद का भोग लगाया गया और उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। आयोजन के दौरान सत्यनारायण शर्मा, धर्मपाल मिठारवाल, महेश पोद्दार, संजीव व्यास, राजीव व्यास, कैप्टन शंकर लाल महारानियां, शिवलाल सैनी, विक्रम जांगिड़, महेंद्र बदनगढ़िया, अनिल लांबीवाला, सुरेन्द्र जोशी, गणेश चेतीवाल, यादव प्रसाद शर्मा, रामनिवास जांगिड़, डॉ तरुण जोशी, तेजप्रकाश सोनी, रजनीकांत तामड़ायत, फूलचंद भगेरिया, बाबूलाल घोघलिया, सांवरमल तिवाड़ी, मास्टर महेंद्र मेघवाल, रत्तीराम राजोतिया, प्रकाश शर्मा, महेंद्र सैनी, अमर राज पंडित, कमलकांत पुजारी, मातादीन महर्षि, परमहंस गणेश नारायण साधना स्थली के महंत विनोद चौरासिया, विवेक तिवाड़ी, पार्थ, कार्तिकेय, सुरेश शेखावत, गिरधर गोपाल महमिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

समारोह के दौरान धर्म और समाजसेवा से जुड़े लोगों की सहभागिता और श्रद्धा ने आयोजन को आध्यात्मिकता के उच्चतम शिखर पर पहुंचाया। पूरे तीन दिन भक्ति गीत, प्रवचन, पूजा और सामूहिक सहभागिता के साथ वातावरण में श्रद्धा और पुण्य का भाव बना रहा।

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