नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले में 28 लोगों की मौत के बाद अब इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) करेगी। गृह मंत्रालय द्वारा निर्देश जारी किए जाने के बाद, आधिकारिक रूप से एनआईए ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और अब वे इस गंभीर हमले की जांच कर रहे हैं। पहलगाम आतंकी हमले के बाद से ही एनआईए की टीम घटनास्थल पर मौजूद है, जिसमें फॉरेंसिक विशेषज्ञ और इन्वेस्टिगेटिंग टीम शामिल हैं।

एनआईए के एक अधिकारी ने पुष्टि की कि इस समय टीम घटना स्थल से सबूत जुटाने में व्यस्त है और पीड़ितों और प्रत्यक्षदर्शियों से जानकारी इकट्ठा करने का काम जारी है। खासतौर पर एनआईए की विशेष टीमों ने हमले में जीवित बचे पर्यटकों और प्रत्यक्षदर्शियों से संपर्क करना शुरू कर दिया है।

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जांच में शामिल हो रही है जम्मू कश्मीर पुलिस और अन्य एजेंसियां

इस जांच में जम्मू कश्मीर पुलिस के साथ-साथ अन्य केंद्रीय एजेंसियां भी एनआईए का सहयोग कर रही हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों द्वारा पीर पंजाल रेंज के घने जंगलों में आतंकवादियों की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान मानव रहित विमानों (यूएवी) और ड्रोन जैसे अत्याधुनिक उपकरणों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जीवित बचे लोगों से बातचीत के जरिए आतंकवादियों के बारे में जरूरी सुराग जुटाने की कोशिश की जा रही है, ताकि हमलावरों को पकड़ा जा सके।

आतंकी हमले के पीछे की साजिश और संदिग्ध आतंकवादी

पहलगाम हमले में 28 लोगों की जान चली गई थी और इस हमले की जांच में जो सुराग मिले हैं, उनके मुताबिक आतंकवादियों की संख्या पांच से सात के बीच हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि इस हमले में पाकिस्तान में प्रशिक्षित स्थानीय आतंकवादियों की मदद भी ली गई थी। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर, मुख्य संदिग्धों में बिजबेहरा निवासी आदिल ठोकर उर्फ ​​आदिल गुरी और त्राल निवासी आसिफ शेख का नाम सामने आया है।

पुलिस के अनुसार, आदिल ठोकर 2018 में पाकिस्तान चला गया था, जहां उसने लश्कर-ए-तैयबा से सशस्त्र प्रशिक्षण लिया था। बाद में वह भारत लौट आया और उसने इस हमले को अंजाम दिया। अधिकारियों का कहना है कि ठोकर और शेख की भूमिका को लेकर जांच तेज कर दी गई है और उन तक पहुंचने के लिए एनआईए और स्थानीय पुलिस मिलकर काम कर रही हैं।

अंतिम मुठभेड़ और आतंकवादियों का खात्मा

हाल ही में, पुलिस, सेना और सीआरपीएफ के सघन अभियान के दौरान दक्षिण और उत्तरी कश्मीर में कुछ मुठभेड़ों की खबरें आई हैं। इनमें से एक प्रमुख मुठभेड़ शुक्रवार को बांदीपुरा जिले में हुई, जिसमें लश्कर के शीर्ष कमांडर अल्ताफ लाली को मार गिराया गया। यह मुठभेड़ एनआईए द्वारा पहलगाम हमले की जांच में जुटे सुरागों के बाद हुई, और इसे एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

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आतंकी हमलों के बाद सुरक्षा इंतजामों में वृद्धि

अधिकारियों ने यह भी बताया कि पहलगाम हमले के बाद कश्मीर घाटी में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सख्त कर दिया गया है। जम्मू और कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में अब आतंकवादी गतिविधियों पर काबू पाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है।

एनआईए द्वारा जांच में जुटे अधिकारियों का कहना है कि वे मामले की गहराई से जांच करेंगे और जितनी जल्दी हो सके हमलावरों को पकड़ने की कोशिश करेंगे। सुरक्षा एजेंसियां इस बात पर विशेष ध्यान दे रही हैं कि जांच की दिशा सही रहे और कोई भी संदिग्ध बच न पाए।

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