वाशिंगटन, अमेरिका: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। उन्होंने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया में व्यापक बदलाव किए गए हैं। इस आदेश के तहत अब संघीय चुनावों में वोट डालने के लिए अमेरिकी नागरिकता अनिवार्य कर दी गई है।
क्या है ट्रंप का नया आदेश?
ट्रंप के आदेश के अनुसार, अमेरिकी संघीय चुनावों में मतदान करने के लिए अब नागरिकता का प्रमाण आवश्यक होगा। इसके तहत वोटर पंजीकरण के समय नागरिकता प्रमाण पत्र, पासपोर्ट या अन्य वैध दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी मतपत्र चुनाव के दिन तक प्राप्त हो जाएं।

ट्रंप ने कहा कि इस आदेश का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बनाए रखना है। उनके अनुसार, इससे चुनावी अनियमितताओं को रोका जा सकेगा।
चुनावी अनियमितताओं के दावों पर जोर
ट्रंप ने आदेश जारी करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में चुनावी अनियमितताओं की घटनाएं बढ़ी हैं। उनके अनुसार, मेल-इन वोटिंग प्रणाली में विशेष रूप से धोखाधड़ी की संभावना अधिक होती है। इस आदेश के तहत संघीय एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे चुनाव अधिकारियों के साथ डाटा साझा करें, जिससे गैर-नागरिकों की पहचान करने में सहायता मिले।
आलोचना और विरोध
ट्रंप के इस आदेश पर विरोध भी शुरू हो गया है। डेमोक्रेट्स और मतदान अधिकार संगठनों ने इसे अव्यवहारिक और भेदभावपूर्ण करार दिया है। कोलोराडो की राज्य सचिव जेना ग्रिसवॉल्ड ने आदेश की निंदा करते हुए इसे “गैरकानूनी” बताया। उन्होंने कहा कि यह आदेश लाखों पात्र अमेरिकी नागरिकों को वोट देने के उनके अधिकार से वंचित कर सकता है।
इसके अतिरिक्त, नागरिक अधिकार समूहों का मानना है कि यह आदेश विशेष रूप से अल्पसंख्यकों, वृद्ध नागरिकों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है, जिनके पास नागरिकता के प्रमाण उपलब्ध नहीं हो सकते।

चुनावी प्रक्रिया में बदलाव का असर
इस आदेश के लागू होने से संघीय चुनावों में मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया अधिक जटिल हो सकती है।
- नागरिकता प्रमाण अनिवार्य: पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र या नागरिकता प्रमाण पत्र के बिना रजिस्ट्रेशन संभव नहीं होगा।
- मेल-इन बैलट पर सख्ती: चुनाव दिवस तक सभी मतपत्रों का प्राप्त होना अनिवार्य होगा।
- डेटा साझा करना: संघीय एजेंसियों और चुनाव अधिकारियों के बीच डेटा शेयरिंग की प्रक्रिया शुरू होगी।