Saturday, March 14, 2026
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अटाला मस्जिद मामला: अमीन को सुरक्षा के लिए कोर्ट का निर्देश, सुनवाई 16 दिसंबर को

 जौनपुर, उत्तर प्रदेश: जौनपुर के अटाला मस्जिद मामले में वादी संतोष कुमार मिश्र की ओर से दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। वादी के अधिवक्ता ने न्यायालय में बहस करते हुए अमीन को विवादित स्थल के निरीक्षण के लिए सुरक्षा प्रदान करने की मांग की। अधिवक्ता ने कहा कि पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया जाए कि अमीन को उनकी रिपोर्ट व नक्शा तैयार करने के लिए सुरक्षा मुहैया कराई जाए।

इस पर न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 दिसंबर की तिथि तय की है।

पूर्व में हुआ था निरीक्षण, अमीन को रोका गया

वादी संतोष कुमार मिश्र की ओर से पहले एक प्रार्थना पत्र दायर किया गया था, जिसमें यह बताया गया कि विवादित स्थल के निरीक्षण के लिए अमीन रामस्वरात मिश्र को भेजा गया था। मौके पर पहुंचने पर प्रतिवादी पक्ष ने विरोध जताते हुए अमीन को अंदर जाने से रोक दिया और भवन के दरवाजे बंद कर दिए। अमीन ने केवल इमारत के बाहरी हिस्से का निरीक्षण किया और कोर्ट में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

रिपोर्ट में यह मांग की गई कि कोर्ट के आदेश का पालन करने और स्थल का विस्तृत निरीक्षण करने के लिए पुलिस बल प्रदान किया जाए। वादी ने इसी आधार पर कोर्ट से पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखने की मांग की है।

मामले का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

वादी का दावा है कि अटाला मस्जिद असल में 13वीं शताब्दी में राजा विजय चंद्र द्वारा बनवाए गए अटला देवी मंदिर का हिस्सा थी। संतोष कुमार मिश्र, जो स्वराज वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष हैं, ने पीस कमेटी जामा मस्जिद मोहल्ला सिपाह के खिलाफ याचिका दायर करते हुए कहा कि यह स्थल सनातन धर्म के लिए महत्वपूर्ण है और यहां पूजा-अर्चना का अधिकार बहाल किया जाना चाहिए।

वादी के अनुसार, जब फिरोज शाह तुगलक ने जौनपुर पर आक्रमण किया, तो उसने मंदिर को क्षतिग्रस्त किया। मंदिर की भव्यता के कारण वह इसे पूरी तरह नष्ट नहीं कर सका और इसके खंभों पर मस्जिद का निर्माण कर दिया। 1408 में शर्की शासक इब्राहिम शाह ने इसे मस्जिद का पूर्ण रूप दिया।

ऐतिहासिक साक्ष्य और वास्तुकला के अवशेष

वादी का दावा है कि अटाला मस्जिद में आज भी हिंदू स्थापत्य शैली और रीति-रिवाजों के अवशेष मौजूद हैं। इतिहासकार अबुल फजल की रचना “आईने अकबरी” में भी इस तथ्य का उल्लेख मिलता है। मंदिर के खंभों और वास्तुशिल्प में हिंदू धर्म के प्रतीक आज भी देखे जा सकते हैं। वादी ने सनातन धर्मावलंबियों के पूजा-अर्चना के अधिकार को बहाल करने की मांग की है।

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