Saturday, February 14, 2026
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“45% जीएसटी घोटाले का धमाका: पूर्व प्रधान इंदिरा डूडी ने विधायक पर लगाए आत्महत्या की धमकी तक के आरोप”

झुंझुनूं: जिले की राजनीति में शुक्रवार को उस समय बड़ा धमाका हुआ, जब चिड़ावा की पूर्व प्रधान इंदिरा डूडी ने प्रेसवार्ता में 45% जीएसटी घोटाले, करोड़ों की कथित अवैध वसूली, अधिकारी–ठेकेदार गठजोड़, राजनीतिक दबाव और स्थानीय विधायक पर आत्महत्या तक की चेतावनी देने के गंभीर आरोप लगाकर पूरे “चिड़ावा मॉडल” को खुला हिमालय बना दिया। इस्तीफा मंजूर होने के अगले ही दिन सामने आए इन खुलासों ने जिले की राजनीति में भूचाल ला दिया है।

इंदिरा डूडी के डेढ़ महीने पुराने इस्तीफे को गुरुवार को मंजूरी मिली और शुक्रवार को उन्होंने निजी रिसोर्ट में प्रेसवार्ता कर आरोपों की पूरी फाइल खोल दी। डूडी ने कहा कि उन्होंने पद छोड़ा है, लेकिन लड़ाई नहीं छोड़ी। उनके मुताबिक, “जनता का एक-एक रुपया वसूला जाएगा, चाहे मामला कोर्ट में ले जाना पड़े।” उन्होंने यह भी दावा किया कि अपने पद से हटना किसी राजनीतिक दबाव का नतीजा था और वे अब इस पूरे मामले की कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं।

इंदिरा डूडी ने कहा कि 2020 में कांग्रेस टिकट पर प्रधान बनने के बाद से ही कुछ स्थानीय नेता उनकी प्रधानी के खिलाफ सक्रिय हो गए थे। उनके अनुसार, यही नेता चुनाव जीतने के बाद तुरंत कांग्रेस से अलग होकर निर्दलीय राजनीति का खेल शुरू कर चुके थे और यहीं से साजिशों का दौर आरंभ हुआ। उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव से लेकर झूठी शिकायतों तक कई हथकंडों से उन्हें पद से हटाने की कोशिश की गई, लेकिन हर जांच में वे क्लीन साबित हुईं।

डूडी ने कहा कि वे और उनका परिवार 20–25 वर्षों से सामाजिक सेवा में हैं और उन पर एक कप चाय तक रिश्वत लेने का आरोप साबित नहीं किया जा सका।
उनके मुताबिक, विभिन्न स्तरों पर जांचों के बाद 30 सितंबर 2025 को उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया और अगले ही दिन 1 अक्टूबर को उन्होंने दोबारा कार्यभार संभाला। लेकिन कार्यालय पहुंचने पर उन्हें जो स्थिति दिखी, वह चौंकाने वाली थी।

डूडी ने कहा कि बाल संरक्षण समिति, जिसमें करोड़ों रुपये का बजट शामिल होता है, उसकी बैठकें बिना उनकी अनुमति के बुलाई जाती थीं। उन्होंने बताया कि रात को संदेश भेजकर सुबह बैठक तय कर दी जाती थी और विकास अधिकारी अपने स्तर पर फाइलें आगे बढ़ा देती थीं। उनके अनुसार, जबरन हस्ताक्षर करवाने का प्रयास भी हुआ, जिसे उन्होंने स्पष्ट रूप से मना कर दिया।

प्रेसवार्ता का सबसे विस्फोटक हिस्सा चिड़ावा पंचायत समिति में कथित “45% जीएसटी मॉडल” था।
डूडी का दावा था कि हर सरकारी काम पर 45% तक की अवैध वसूली की जाती थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि—

5% विकास अधिकारी
4% AEN
3% अन्य अधिकारी

और बाकी हिस्सा स्थानीय नेताओं के बीच विभाजित होता था

डूडी ने कहा कि इस खेल में जनता के करोड़ों रुपये डूबे और ठेकेदारों को खुलेआम कट का रेट बताया जाता था।

इंदिरा डूडी ने आरोप लगाया कि दिव्या कंस्ट्रक्शन कंपनी में रोहतास धांगड़, उनका ड्राइवर और विकास अधिकारी तक कथित रूप से साझेदार बताए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि स्वीकृति मिलते ही 40% एडवांस रिलीज कर दिया जाता था और काम पूरा होने से पहले ही भुगतान निकाल लिया जाता था। उन्होंने दावा किया कि 10,41,063 रुपये के एक टेंडर में 4,91,000 रुपये कमीशन के रूप में बांटे गए, और यह पूरा रिकॉर्ड उनके पास मौजूद है।

डूडी ने बताया कि एक मामले में 50 लाख रुपये की जीएसटी वसूली का वीडियो वायरल होने के बाद ठेकेदार का भुगतान रोक दिया गया। ठेकेदार ने कलेक्टर और CEO से इसकी शिकायत की, जिससे मामला और तूल पकड़ गया। उनके अनुसार, पूरा काम होने के बाद भी भुगतान को अधिकारी के पास जाकर मिलने की शर्त जोड़ दी गई थी।

डूडी का कहना है कि उनका निलंबन भी इसी भ्रष्टाचार और राजनीतिक साजिश का हिस्सा था। उन्होंने बताया कि जिस दुकान को वे तीन साल की अवधि पूरी होने के बाद वापस ले चुकी थीं, उसी को आधार बनाकर शिकायत करवा दी गई, जबकि उसका कोई आधार नहीं था।

“विधायक बोला—नाक कट जाएगी, सोलर कनेक्शन हुआ तो आत्महत्या कर लूंगा” यह डूडी के आरोपों का सबसे गंभीर हिस्सा था। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय विधायक लगातार कहता था—“अगर यह काम हुआ तो मेरी नाक कट जाएगी।”

उन्होंने कहा कि—

कुसुम योजना के सोलर प्लांट कनेक्शन के समय
पंचायत परिसीमन के मुद्दे पर
और कई अन्य फाइलों पर

विधायक ने इसी तर्ज पर दबाव बनाया। डूडी ने दावा किया कि एक बार तो विधायक ने एक अधिकारी से कहा—“अगर सोलर कनेक्शन हो गया तो मैं आत्महत्या कर लूंगा।” उन्होंने कहा कि वे किसी की जान अपने सिर पर नहीं लेना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

डूडी ने बताया कि इस्तीफे के बाद उपप्रधान को पद संभालना चाहिए था, लेकिन उपप्रधान ने बीमारी का हवाला देकर खुद को अलग कर लिया और रोहतास धाकड़ को कार्यभार देने का अनुरोध कर दिया। डूडी ने इसे भी एक “योजनाबद्ध राजनीतिक सेटअप” बताया।

डेढ़ साल की राजनीति: अविश्वास से इस्तीफा मंजूर होने तक

दिसंबर 2020 में डूडी प्रधान बनीं
जुलाई 2024 में अविश्वास प्रस्ताव आया
अक्टूबर 2024 में निलंबित कर दी गईं
दिसंबर 2024 में रोहतास धांगड़ कार्यवाहक बने
सितंबर 2025 में डूडी बहाल हुईं
अक्टूबर 2025 में उन्होंने इस्तीफा दिया
21 नवंबर 2025 को इस्तीफा मंजूर हुआ

डूडी की प्रेसवार्ता के बाद यह मामला अब जिला स्तर से उठकर प्रदेश की राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है।

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