सूरजगढ़: कस्बे से 378वीं ऐतिहासिक प्राचीन श्याम निशान पदयात्रा महंत मनोहर लाल सैनी के सानिध्य में खाटू धाम के लिए रवाना हुई। हजारों श्रद्धालु नंगे पांव, महिलाओं की जलती सिगड़ी और चार दिवसीय पड़ाव के साथ यह धार्मिक यात्रा फाल्गुन द्वादशी को खाटू मंदिर के शिखर पर निशान अर्पित करेगी।
खाटु धाम के लिए रवाना हुआ 378वां ऐतिहासिक प्राचीन श्याम निशान
सूरजगढ़ से प्राचीन श्री श्याम मंदिर के सानिध्य में सोमवार को 378वीं विशाल ऐतिहासिक श्याम निशान पदयात्रा का शुभारंभ हुआ। महंत मनोहर लाल सैनी की अगुवाई में सुबह 10:15 बजे विशेष पूजा-अर्चना के बाद यह धार्मिक यात्रा खाटू धाम के लिए रवाना हुई। हजारों श्रद्धालु बाबा श्याम के जयकारों के साथ नंगे पांव डीजे की धुनों पर नाचते-गाते खाटू धाम की ओर प्रस्थान कर गए।
कस्बे में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर निशान का स्वागत किया। बाबा हाथों में मोर छड़ी लेकर भक्तों को आशीर्वाद देते हुए यात्रा का नेतृत्व करते नजर आए। भारी भीड़ के चलते 10 किलोमीटर की दूरी तय कर चिड़ावा पहुंचने में ही 8 से 10 घंटे का समय लग जाता है, जो श्रद्धालुओं की अपार आस्था को दर्शाता है।
सैंकड़ों महिलाएं जलती सिगड़ी लेकर चल रहीं पदयात्रा में आगे
मंदिर से सबसे पहले बालाजी महाराज का निशान रवाना होता है, जो श्याम निशान की अगवानी करता है। इसके बाद सैंकड़ों महिलाएं सिर पर जलती सिगड़ी रखकर पदयात्रा में आगे-आगे चलती हैं। यह परंपरा वर्षों पुरानी है और इसे मन्नत पूरी होने की आस्था से जोड़ा जाता है।
मन्नत पूरी होने पर निभाई जाती है तह अनोखी परंपरा
मान्यता है कि जिन भक्तों की मनोकामना पूरी होती है, वे महिलाएं जलती सिगड़ी लेकर चार दिन की पदयात्रा पूरी करती हैं और बाबा के दरबार में हाजिरी लगाती हैं। यह दृश्य श्रद्धा और विश्वास का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।
चार दिन के पड़ाव के बाद पहुंचेगा निशान खाटुधाम, पहला पड़ाव सुलताना, फिर गुढ़ा गौड़जी और गुरारा
श्याम निशान पदयात्रा चार दिन के निर्धारित पड़ावों के साथ खाटू धाम पहुंचेगी। पहले दिन सुलताना में विश्राम होगा। दूसरे दिन गुढ़ा गौड़जी में रात्रि विश्राम किया जाएगा, जबकि तीसरे दिन गुरारा में रुकने के बाद चौथे दिन खाटू धाम में प्रवेश किया जाएगा।
सूरजगढ़ धर्मशाला में दो दिन विश्राम, फिर निशान मंदिर शिखर पर अर्पण
खाटु पहुंचने पर श्रद्धालु निशान का भव्य स्वागत कर उसे सूरजगढ़ धर्मशाला तक लेकर जाएंगे। वहां दो दिन विश्राम के दौरान निशान की पूजा-अर्चना और भजन संध्या का आयोजन होगा। फाल्गुन मास की द्वादशी को यह ऐतिहासिक निशान खाटू मंदिर के शिखर बुर्ज पर चढ़ाया जाएगा, जो वर्ष भर मंदिर पर लहराता रहेगा।
धार्मिक आस्था का महासंगम बना सूरजगढ़
यह ऐतिहासिक श्याम निशान पदयात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्रीय एकता और सांस्कृतिक परंपरा का भी जीवंत उदाहरण है। हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी ने इसे भव्य और ऐतिहासिक बना दिया।





