Saturday, February 14, 2026
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100 मीटर की सीमा पर बवाल! अरावली परिभाषा को लेकर पिलानी में प्रदर्शन

पिलानी: शहर में अरावली पर्वत श्रृंखला को लेकर सरकार द्वारा की गई संशोधित परिभाषा के विरोध में जनाक्रोश खुलकर सामने आया। मुख्य बाजार में आयोजित जोरदार प्रदर्शन के दौरान पर्यावरण प्रेमियों, किसानों, युवाओं और व्यापारियों ने एकजुट होकर अरावली बचाने की हुंकार भरी। प्रदर्शनकारियों ने 100 मीटर से अधिक ऊंचाई को अरावली मानने की परिभाषा को पर्यावरण, जल संरक्षण और जनजीवन के लिए गंभीर खतरा बताते हुए उसकी प्रतिलिपि जलाकर विरोध दर्ज कराया।

मुख्य बाजार पिलानी में हुआ यह प्रदर्शन देशभर में चल रहे राष्ट्रव्यापी आंदोलन की कड़ी के रूप में सामने आया। ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन और ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक यूथ ऑर्गेनाइजेशन (AIDYO) के संयुक्त आह्वान पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आम नागरिकों की भागीदारी देखी गई। प्रदर्शन के दौरान अरावली बचाओ, पर्यावरण बचाओ, जल-जंगल-जमीन बचाओ और संशोधित परिभाषा वापस लो जैसे नारे लगातार गूंजते रहे।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए शंकर दहिया, डॉ. रविकांत पांडे, महावीर प्रसाद शर्मा और विष्णु वर्मा ने कहा कि अरावली पर्वत श्रृंखला की परिभाषा में किया गया यह संशोधन केवल कागजी बदलाव नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी दुष्परिणाम पूरे उत्तर भारत को झेलने पड़ेंगे। वक्ताओं ने चेताया कि इससे जल स्रोतों का क्षरण होगा, भूजल स्तर गिरेगा और पर्यावरण असंतुलन और अधिक गहराएगा।

राजेंद्र सिहाग, संदीप शर्मा, विनोद वर्मा और सुनील शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली से बाहर करने का निर्णय खनन को खुली छूट देने जैसा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह फैसला किसानों, ग्रामीण क्षेत्रों और आम जनजीवन पर सीधा हमला है, जिससे भविष्य में पानी और हरियाली का संकट और गहरा जाएगा।

प्रदर्शन के दौरान पिलानी के मुख्य बाजार के दुकानदारों और स्थानीय नागरिकों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। धर्मपाल सैनी और महादेवाराम जांगिड़ ने कहा कि अरावली केवल पहाड़ नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए संशोधित परिभाषा को तत्काल वापस लिया जाए।

कार्यक्रम के अंत में प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में सरकार से अरावली पर्वत श्रृंखला की संशोधित परिभाषा को रद्द करने, पर्यावरण संरक्षण कानूनों को सख्ती से लागू करने और अरावली क्षेत्र में किसी भी प्रकार की छूट समाप्त करने की मांग की।

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