हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर मार्ग पर मची भगदड़ में आठ श्रद्धालुओं की मौत, करंट फैलने की अफवाह से मचा हड़कंप, संकरी चढ़ाई, बारिश में फिसलन और भारी भीड़ के बीच अफवाह ने ली आठ जिंदगियां, कई घायल

उत्तराखंड: हरिद्वार स्थित प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर के रास्ते पर रविवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया। भीड़ के अत्यधिक दबाव के बीच करंट फैलने की अफवाह ने अफरा-तफरी मचा दी। भगदड़ की चपेट में आकर आठ श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जिनमें एक बच्चा भी शामिल था। करीब 23 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें से पांच की हालत नाजुक बताई जा रही है।

घटना के समय मंदिर मार्ग पर भारी भीड़ मौजूद थी। सावन मास और रविवार होने के कारण हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे। मंदिर पहाड़ी पर स्थित है और वहां पहुंचने के लिए एक संकरा मार्ग व सीढ़ियां हैं। बारिश के कारण सीढ़ियों पर फिसलन की स्थिति बनी हुई थी। जैसे ही करंट फैलने की अफवाह फैली, श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई और लोग एक-दूसरे को रौंदते हुए भागने लगे।

हरिद्वार पुलिस ने बताया कि हादसा सुबह लगभग 9 बजे हुआ। सूचना मिलते ही पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचा। घटनास्थल से घायलों को तत्काल अस्पताल भिजवाया गया, जहां करीब 35 लोगों को भर्ती किया गया है। एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने बताया कि प्रारंभिक जांच में करंट फैलने की कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अफवाह के कारण भगदड़ जरूर मची।

बिहार के फरीदाबाद निवासी संतोष ने बताया कि श्रद्धालु मंदिर की ओर चढ़ाई के दौरान दीवार से लगी लोहे की तारों को पकड़कर ऊपर जा रहे थे। उसी दौरान तार छिलने से कुछ लोगों को करंट का झटका लगा, जिससे भगदड़ की स्थिति बन गई। संतोष ने बताया कि वह खुद भी भगदड़ में गिर गया और अपने साथियों से बिछड़ गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हादसे पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि मनसा देवी मंदिर मार्ग पर मची भगदड़ की खबर अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने बताया कि एसडीआरएफ, स्थानीय पुलिस और अन्य बचाव एजेंसियां राहत कार्य में जुटी हुई हैं और वे स्वयं स्थिति पर निगरानी बनाए हुए हैं। मुख्यमंत्री ने सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षा और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

यह हादसा धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन और आपदा नियंत्रण की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। सावन जैसे पर्वों के दौरान प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता और व्यवस्था की आवश्यकता होती है, जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सके।

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