Saturday, February 21, 2026
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विश्व सामाजिक न्याय दिवस पर चिड़ावा थाने में मंथन, सामाजिक न्याय की अवधारणा को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प

चिड़ावा: शुक्रवार 20 फरवरी को “विश्व सामाजिक न्याय दिवस” के उपलक्ष में चिड़ावा थाने में एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम एडीआर के निर्देशन तथा एसीजेएम मोहनलाल बेदी की प्रेरणा से तालुका विधिक सेवा समिति द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता थानाधिकारी आशाराम गुर्जर ने की।

अधिवक्ता अभिषेक महमिया ने बताया कि सामाजिक न्याय दिवस के अवसर पर इस बार आयोजन को पुलिस थाने में आयोजित करने का उद्देश्य कानून और न्याय की अवधारणा को सीधे सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ना था। उन्होंने कहा कि इससे पहले इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यालयों और महाविद्यालयों में आयोजित होते रहे हैं, किंतु इस बार पुलिस प्रशासन को केंद्र में रखकर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।

संगोष्ठी में मुख्य अतिथि मोहनलाल बेदी ने सामाजिक न्याय की मूल भावना, संविधान में निहित अधिकारों और नागरिक कर्तव्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। बार अध्यक्ष विजय गोरावा ने कहा कि सामाजिक समानता और मानव अधिकारों की रक्षा के लिए न्याय व्यवस्था को जनसुलभ बनाना आवश्यक है।

अधिवक्ता लोकेश शर्मा ने जानकारी दी कि सामाजिक न्याय दिवस का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन यदि सामाजिक न्याय की अवधारणा को अपनाकर कार्य करे तो आमजन का विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।

कार्यक्रम में अधिवक्ता रोबिन शर्मा, दीपक स्वामी, एसआई कैलाश चन्द्र, एएसआई ओमप्रकाश नरुका, एएसआई अनिल कुमार, एएसआई मनीष कुमार, हेड कांस्टेबल जगदीप राव, हेड कांस्टेबल अमित कुमार, हेड कांस्टेबल द्वारका, हेड कांस्टेबल राजवीर, कांस्टेबल अमित सिहाग, अंकित, बाबूलाल, अमित डाटीका, प्रदीप कुमार, विकास डारा, विकास कुमार, महिला कांस्टेबल उर्मिला सहित पुलिस थाने का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा और सामाजिक न्याय के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि सामाजिक न्याय केवल एक दिवस तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह सतत प्रक्रिया है। पुलिसकर्मियों के माध्यम से यदि कानूनी जागरूकता अभियान को गति मिले तो समाज में समानता, न्याय और सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।

इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि न्याय व्यवस्था और पुलिस प्रशासन के समन्वय से ही एक सशक्त और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण संभव है।

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