चिड़ावा: क्षेत्र में विद्युत विभाग के दो अलग-अलग इकाइयों के बीच चल रहे आपसी टकराव का खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। अजमेर विद्युत वितरण निगम के कर्मचारी और ठेका आधार पर कार्यरत एफआरटी टीम के बीच पिछले कुछ महीनों से चली आ रही खींचतान अब सार्वजनिक परेशानी का कारण बन गई है। गर्मी के इस मौसम में जब बिजली की आवश्यकता सबसे अधिक होती है, तब विभागीय जिम्मेदारियों के बीच फंसी जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
दरअसल, शहर में रात आठ बजे के बाद जब किसी क्षेत्र में बिजली फाल्ट होता है, तो उसे ठीक करने में घंटों लग जाते हैं। यदि फाल्ट उस स्थान पर होता है, जहां से 11 हजार वॉल्ट की लाइन गुजरती है, तो उसे सुधारने के लिए पावर हाउस या सब स्टेशन से ‘शट डाउन’ लेना जरूरी होता है। यहीं से असली समस्या शुरू होती है। एफआरटी टीम का कहना है कि बिना अधिकारी की अनुमति के उन्हें शट डाउन नहीं दिया जाता और अधिकारी रात को ना ही कॉल उठाते हैं, ना ही किसी प्रकार की जिम्मेदारी लेते हैं। वहीं दूसरी ओर विभागीय अधिकारियों का कहना है कि एफआरटी टीम को स्वयं सब स्टेशन या पावर हाउस पर जाकर शट डाउन की प्रक्रिया को पूरा करना होता है।
इस आपसी खींचतान के कारण महज 15 मिनट के काम को पूरा होने में कई घंटे लग जाते हैं। कई बार पूरी रात बिजली गुल रहती है, जिससे आमजन परेशान हो जाते हैं। शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार समय पर मौके पर नहीं पहुंचते। बीते तीन-चार महीनों से लगातार यह स्थिति बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
रविवार को वार्ड संख्या 23 में ऐसी ही स्थिति देखने को मिली, जहां एक पुराना बिजली पोल एक पेड़ के दबाव में आकर ऊपर से टूट गया। मोहल्लेवासियों ने इस संबंध में शुक्रवार को ही विभाग को सूचित कर दिया था कि पेड़ के दबाव से पोल गिर सकता है। शनिवार रात को तार टूट गए, जिससे आसपास का क्षेत्र अंधेरे में डूब गया। रविवार सुबह 11 बजे के करीब जब पेड़ का दबाव और बढ़ा, तो पोल भी ऊपर से पूरी तरह टूट गया। हालांकि इसकी जानकारी संबंधित विभाग को दी गई, लेकिन दोपहर तक कोई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा।

शाम 5 बजे तक जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तब जेईएन से संपर्क किया गया, जिन्होंने जानकारी ना होने की बात कही, जबकि विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप में एक बजे ही टूटे हुए पोल की तस्वीरें साझा की जा चुकी थीं। कई बार फोन करने के बाद शाम करीब 6 बजे एफआरटी टीम मौके पर पहुंची। लेकिन नया पोल लगाने की बजाय टीम ने टूटे तारों को रस्सी के सहारे घरों के छज्जों से बांधकर बिजली सप्लाई चालू कर दी। पोल पूरी तरह लटक रहा है और वह कभी भी गिर सकता था, जिससे लोगों की जान को खतरा बना रहेगा।
स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर रोष व्याप्त है कि यदि रात में कोई पशु टकरा गया या तेज हवा चली, तो यह पोल गिर सकता है। हालांकि लोग इस बात से आंशिक रूप से संतुष्ट भी हैं कि 24 घंटे बाद ही सही, विभाग की टीम आई और बिजली आपूर्ति को बहाल किया गया।
इस प्रकार की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि विभागीय लापरवाही और जिम्मेदारियों के निर्वहन में आ रहे टकराव की कीमत आमजन को चुकानी पड़ रही है। गर्मी के इस दौर में जब बिजली जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन गई है, तब विभागीय समन्वय की कमी आम नागरिकों की परेशानी का कारण बन रही है। जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मुद्दे को गंभीरता से लें और आपसी तालमेल बढ़ाकर आमजन को राहत दिलाएं।