नई दिल्ली: दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 में भारत की मौजूदगी इस बार खास चर्चा में है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की अगुवाई में गई भारतीय टीम को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी से जोड़कर देखा जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि क्या भारत इस मंच से अमेरिका को कड़ा रणनीतिक संदेश देने जा रहा है और क्या यह दौरा ग्लोबल पॉलिटिक्स में कोई बड़ा मोड़ लाएगा।
दावोस में भारत की अब तक की सबसे बड़ी टीम, निवेश पर बड़ा फोकस
दावोस में 19 से 23 जनवरी 2026 तक चलने वाली वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक में भारत ने इस बार अब तक की सबसे बड़ी टीम भेजी है। भारत का मकसद दुनिया को यह बताना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है और यह निवेश के लिए एक भरोसेमंद गंतव्य है। केंद्र सरकार के मंत्री, कई राज्यों के मुख्यमंत्री, देश के बड़े उद्योगपति और प्रभावशाली चेहरे इस मंच पर भारत का पक्ष रख रहे हैं।
अजीत डोभाल की मौजूदगी क्यों मानी जा रही है रणनीतिक संकेत
दावोस में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई अजीत डोभाल कर रहे हैं। उनके साथ अश्विनी वैष्णव, शिवराज सिंह चौहान, प्रह्लाद जोशी और के. राममोहन नायडू जैसे केंद्रीय मंत्री भी मौजूद हैं। महाराष्ट्र से देवेंद्र फडणवीस, आंध्र प्रदेश से एन. चंद्रबाबू नायडू, असम से हिमंता बिस्वा सरमा, मध्य प्रदेश से मोहन यादव, तेलंगाना से ए. रेवंत रेड्डी और झारखंड से हेमंत सोरेन भी कई सत्रों में हिस्सा ले रहे हैं।
डोभाल की मौजूदगी को सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सुरक्षा और भू-राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, WEF अब केवल आर्थिक मंच नहीं रहा, बल्कि यह ग्लोबल सिक्योरिटी और स्ट्रैटेजिक डायलॉग का बड़ा केंद्र बन चुका है।
क्या ट्रंप को संदेश देने के लिए भेजे गए हैं अजीत डोभाल?
इस बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भागीदारी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। विदेश मामलों के जानकार ए. के. पाशा का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जानबूझकर अजीत डोभाल को भेजा है ताकि अमेरिका को यह संदेश जाए कि भारत दबाव में फैसले नहीं करता।पाशा के मुताबिक, भारत इस मंच पर अमेरिका के साथ किसी बड़े रणनीतिक या आर्थिक समझौते की संभावनाएं भी तलाश रहा है। डोभाल को प्रधानमंत्री का सबसे भरोसेमंद सलाहकार माना जाता है और इसी वजह से उन्हें इस अहम मंच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उद्योग जगत और इन्फ्लुएंसर्स से भारत का सॉफ्ट पावर प्रदर्शन
दावोस में मुकेश अंबानी, एन. चंद्रशेखरन, संजीव बजाज, हरि एस. भारतिया, सुंदरशन वेणु और अनीश शाह जैसे बड़े उद्योगपति निवेश को लेकर वैश्विक नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। इसके साथ ही मासूम मिनावाला मेहता, भूमि पेडनेकर, स्मृति ईरानी, निवृति राय, संगीता रेड्डी और दीपाली गोयनका जैसे प्रभावशाली चेहरे भारत की छवि को सॉफ्ट पावर के रूप में मजबूत कर रहे हैं।
भारत का संदेश – पार्टनर बनो और भविष्य में शामिल हो जाओ
भारतीय प्रतिनिधि भू-आर्थिक तनाव, जरूरी मिनरल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एनर्जी ट्रांजिशन जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। कई सत्रों में यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। भारत का साफ संदेश है कि वैश्विक निवेशक भारत के साथ साझेदारी करें और स्थिर भविष्य का हिस्सा बनें।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर WEF की बड़ी भविष्यवाणी
WEF के प्रेसिडेंट बोर्ज ब्रेंडे ने कहा है कि 2026 में भारत बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश होगा और वैश्विक विकास में 20 प्रतिशत तक योगदान दे सकता है। उन्होंने मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों की भी खुलकर तारीफ की है।
WEF 2026 की थीम और वैश्विक तनाव के बीच संवाद की कोशिश
दावोस में हो रही WEF की 56वीं बैठक की थीम “A Spirit of Dialogue” रखी गई है, यानी संवाद की भावना। अमेरिका-चीन तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे हालात के बीच यह मंच देशों के बीच बातचीत बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।





