नई दिल्ली: यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक कदम सामने आया है। रूस ने राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को शांति वार्ता के लिए मॉस्को आमंत्रित किया है, जबकि अमेरिका की मध्यस्थता से रूस-यूक्रेन शांति वार्ता को फिर से गति देने के प्रयास तेज हो गए हैं। यह घटनाक्रम वैश्विक राजनीति, यूरोप सुरक्षा संकट और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
रूस का जेलेंस्की को शांति वार्ता का औपचारिक निमंत्रण
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के अनुसार, मॉस्को ने राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को औपचारिक रूप से शांति वार्ता के लिए आमंत्रित किया है। हालांकि, अब तक कीव की ओर से इस निमंत्रण पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निमंत्रण यूक्रेन युद्ध समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत हो सकता है।
पहले भी ठुकराया गया था मॉस्को का बुलावा
पिछले वर्ष राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इसी तरह के एक रूसी निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया था। उस समय उन्होंने स्पष्ट किया था कि वह उस देश की राजधानी नहीं जा सकते, जो लगातार यूक्रेन पर मिसाइल हमले कर रहा हो। इसके बजाय उन्होंने सुझाव दिया था कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को कीव आना चाहिए।
अमेरिका की मध्यस्थता से तेज हुई शांति वार्ता प्रक्रिया
पिछले सप्ताह अबू धाबी में अमेरिका की मध्यस्थता से रूस-यूक्रेन शांति वार्ता को दोबारा शुरू करने का प्रयास किया गया। हालांकि, रूसी और यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडलों के बीच कई अहम मुद्दों पर अब भी गहरे मतभेद बने हुए हैं। एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की संभावित मुलाकात अब पहले से कहीं अधिक करीब मानी जा रही है।
रविवार को अबू धाबी में शांति वार्ता का अगला दौर
रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता का एक और चरण रविवार को अबू धाबी में आयोजित होने वाला है। इस प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरों में संघर्ष समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस वार्ता को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं और कहा है कि बातचीत में “बहुत सकारात्मक चीजें” हो रही हैं।
युद्धविराम को लेकर ट्रंप का बड़ा दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक सप्ताह तक कीव और अन्य यूक्रेनी शहरों पर हमले न करने पर सहमत हो गए हैं। ट्रंप के अनुसार, कड़ाके की ठंड और कई इलाकों में हीटिंग की कमी को देखते हुए उन्होंने व्यक्तिगत रूप से पुतिन से हमले रोकने का आग्रह किया था।
शांति समझौते में अब भी बड़े विवादित मुद्दे
यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के रास्ते में कई जटिल और विवादित मुद्दे अब भी बने हुए हैं। इनमें सबसे प्रमुख सवाल यह है कि संभावित शांति समझौते में किस देश को कौन सा इलाका मिलेगा। इसके अलावा युद्ध के बाद यूक्रेन में अंतरराष्ट्रीय शांति रक्षकों या पर्यवेक्षकों की भूमिका, और रूसी नियंत्रण वाले ज़ापोरिज़िया परमाणु ऊर्जा संयंत्र का भविष्य भी अहम मुद्दे बने हुए हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि क्षेत्रों के बंटवारे को लेकर मतभेद सबसे कठिन और संवेदनशील विषयों में से एक हैं, जिन्हें सुलझाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
डोनेट्स्क क्षेत्र को लेकर रूस और यूक्रेन में टकराव
रूस की मांग है कि यूक्रेनी सेना डोनेट्स्क क्षेत्र के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से से पीछे हट जाए, जिस पर अभी रूस का पूर्ण नियंत्रण नहीं है। वहीं यूक्रेन का स्पष्ट कहना है कि वह ऐसे इलाकों को रूस को सौंपने के लिए तैयार नहीं है, जिन्हें रूस ने युद्ध के मैदान में पूरी तरह हासिल नहीं किया है और जो भविष्य में रूसी सैन्य विस्तार का आधार बन सकते हैं।
वैश्विक राजनीति पर यूक्रेन युद्ध का असर
यूक्रेन युद्ध न केवल यूरोप बल्कि पूरी वैश्विक राजनीति, ऊर्जा संकट, परमाणु सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को प्रभावित कर रहा है। रूस द्वारा जेलेंस्की को शांति वार्ता के लिए आमंत्रण को कई विश्लेषक संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक संभावित निर्णायक मोड़ मान रहे हैं।





