जयपुर: राजस्थान सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों को लेकर एक बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है। राज्य में किराए के भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को अब नजदीकी सरकारी स्कूलों में शिफ्ट किया जाएगा। इस फैसले से न केवल बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा, बल्कि 6 वर्ष की आयु पूरी होने पर उन्हें उसी स्कूल में सीधे प्रवेश का लाभ भी मिलेगा। महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है।
किराए के भवनों से हटेंगे आंगनबाड़ी केंद्र, स्कूलों में होगी नई शुरुआत
राज्य सरकार के निर्देश के बाद किराए के कमरों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों को पास के सरकारी स्कूल परिसरों में स्थानांतरित किया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित और शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इससे स्कूल प्रबंधन की निगरानी भी मजबूत होगी और आंगनबाड़ी की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
6 साल पूरे होते ही उसी स्कूल में मिलेगा प्रवेश
नई व्यवस्था के तहत आंगनबाड़ी में शाला पूर्व शिक्षा लेने वाले बच्चों को 6 वर्ष की आयु पूरी होते ही उसी सरकारी स्कूल में प्राथमिक कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा। इससे बच्चों की पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी और अभिभावकों को अलग-अलग स्कूल ढूंढने की परेशानी नहीं होगी।
दूरी का मानक तय, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अलग नियम
महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी केंद्रों को शिफ्ट करने के लिए दूरी का स्पष्ट मानक तय किया है। शहरी क्षेत्रों में 1 किमी के दायरे में स्थित सरकारी स्कूलों में आंगनबाड़ी केंद्र स्थानांतरित होंगे, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 500 मीटर के भीतर आने वाले स्कूलों को प्राथमिकता दी जाएगी। जो केंद्र सीधे स्कूलों में शिफ्ट नहीं हो पाएंगे, उनकी नजदीकी स्कूलों से मैपिंग की जाएगी।
जयपुर में सबसे ज्यादा किराए के भवनों में चल रहे केंद्र
प्रदेश में सबसे अधिक किराए के भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र जयपुर जिले में हैं। जिले में कुल 1078 आंगनबाड़ी केंद्र किराए के कमरों में चल रहे हैं। कई केंद्र बेहद छोटे और असुविधाजनक कमरों में संचालित हो रहे हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही थीं।
विभाग का कहना – बच्चों को मिलेगा बेहतर माहौल और मजबूत निगरानी
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों को स्कूलों से जोड़ने से स्कूल प्रबंधन की निगरानी मजबूत होगी। बच्चों को स्कूल जैसा वातावरण मिलेगा और प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। साथ ही, आंगनबाड़ी और प्राथमिक शिक्षा के बीच बेहतर समन्वय भी स्थापित होगा।





